रांची(ब्यूरो)।फलक पर हैं मोती बहुत, उठाने वाला चाहिए। कौन कहता है कि झुकता नहीं आसमां, झुकाने वाला चाहिए। इन पंक्तियों को झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन के रिजल्ट में शानदार प्रदर्शन करके कैंडिडेट्स ने एक बार फिर से चरितार्थ कर दिया है। एक ओर जहां लगातार 12 साल अथक प्रयास करके गढ़वा के सतीश कुमार पाठक ने सफलता हासिल की है तो दूसरी ओर खलारी में एक शिक्षक पुत्र ने अपने बड़े भाई की सफलता से प्रेरणा लेकर जेपीएससी को क्वालीफाई कर लिया है। यानी जब लगन हो और मेहनत करने का जज्बा तो आपकी सफलता निश्चित है। इसे कोई रोक नहीं सकता। आइए जानते हैं ऐसे ही दो स्टूडेंट्स की सक्सेस स्टोरी।

गढ़वा के सतीश पाठक बने जिला समादेष्टा

गढ़वा जिला के बिशुनपुरा प्रखंड अंतर्गत सरांग पंचायत के ग्राम जतपुरा निवासी सतीश कुमार पाठक पिछले 12 वर्षों के लगातार अथक संघर्षों की बदौलत 10वीं जेपीएससी के माध्यम से जिला समादेष्टा (डीएसपी इन होम गार्ड) का पद पाने में कामयाब रहे हैं। वह कहते हैं कि मेरी सफलता में ईश्वर का आशीर्वाद, माता-पिता, भाई-बहन, मित्र सभी का अहम योगदान है। विशेषकर बड़े भैया दिलीप पाठक, मित्र डॉ भारद्वाज शुक्ला, शिक्षक संजय तिवारी समेत अन्य का मोटिवेशन व योगदान पढ़ाई में प्रत्यक्ष रूप से हर एक स्तर पर रहा।

2010 से प्रयास जारी

2010 से रांची के पतंजलि आईएएस एकेडमी से जुड़कर तैयारी की। इसी बीच 2017 में जेएसएससी वनरक्षक के पद पर ज्वाइन किया। इसके बावजूद प्रयास जारी रखा। बता दें कि जेपीएससी में लगातार दूसरा अटेम्प्ट था जब वे इंटरव्यू तक पहुंचे थे।

क्या कहते हैं सगे-संबंधी

उनके करीबी मित्रों, घर परिवार और जानकार लोगों का मानना है कि बचपन से ही मेधावी एवं अभाव में भी अपने हौसले को उड़ान देने का बुलंद इरादा व सपनों को संजोए रखने का जुनून था, जिसकी बदौलत आज उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया है। सतीश की सफलता पर उनके परिवार, कुटुंब एवं सरांग पंचायत वासी के साथ गढ़वा जिला के लोगों ने शुभकामनाएं एवं बधाइयां दी हैं।

भाई की सफलता ने दिखाई राह, हासिल किया मुकाम

मेरे छोटे भाई जो वर्तमान में खूंटी जिला के रनिया में अंचल अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं, उनकी सफलता से प्रेरणा लेकर मैंने भी जेपीएससी की पहली ही परीक्षा में सफलता हासिल की और सेवा भाव के साथ अपने कर्तव्य का निर्वाह करना चाहता हूं। ये बातें जेपीएससी की परीक्षा में 144 वां रैंक लाने वाले खलारी डकरा के सुमित कुमार झा ने कही है।

स्कूल टीचर हैं पिता

सुमित कुमार झा के पिता वीरेंद्र झा डकरा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में बतौर शिक्षक कार्यरत हैं। सुमित बुधवार की सुबह पटना से जैसे ही डकरा स्थित अपने आवास पहुंचे, पुत्र को देखकर माता-पिता दोनों की आंखें भर आईं। सुमित के मामा आनंद झा और पूरे परिजनों ने मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। सुमित के पिता प्राइवेट स्कूल में शिक्षक का कार्य करते हुए अपने दोनों पुत्रों को सफलता तक पहुंचाया।

खलारी कोयलांचल का मान

सुमित के जेपीएससी पास करने और डकरा आने की खबर सुनकर सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के प्राचार्य गोपाल विश्वकर्मा मिस्त्री भी उनके आवास पहुंचे सुमित को बधाई दी। सुमित के पिता बिरेंद्र झा बताते हैं कि कम तनख्वाह मिलने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी, हर परिस्थिति में पत्नी और साले आनंद झा का पूरा साथ मिला। आज दोनों बच्चों ने सिविल और प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर पूरे परिवार के साथ साथ खलारी कोयलांचल का मान बढ़ाया है।