RANCHI:रांची में कोरोना का दूसरा दौर काफी डेडली रहा। अब तीसरी लहर को लेकर बेहद गंभीर आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का अनुमान है कि तीसरे वेव में नियो नेटल (0-17 वर्ष) के करीब सात लाख पॉजिटिव केसेज सामने आ सकते हैं। दूसरे वेव में रांची में सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। इस लिहाज से तीसरे वेव के लिए भी रांची को सबसे ज्यादा जोखिम वाला जिला माना जा रहा है। इसे देखते हुए विभाग से लेकर डॉक्टर्स तक यह सलाह दे रहे हैं कि ब<स्हृद्द-क्तञ्जस्>चों को कोरोना के तीसरे वेव में बचाने के लिए कमर कस लेनी होगी और उ<स्हृद्द-क्तञ्जस्>च स्तर का एहतियात बरतना होगा। किसी भी प्वाइंट पर लापरवाही घातक सिद्ध हो सकती है।

दूसरी लहर में भी बच्चे आए चपेट में

राजधानी में कोरोना के सेकेंड वेव में 0 से 14 आयु वर्ग के करीब 2509 बच्चे संक्रमित हुए हैं। तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमण की आशंकाओं के बीच बहुत से पैरेंट्स इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि कहीं बच्चे दोबारा संक्रमित न हो जाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरी लहर में शहर में 14 साल तक के करीब 2509 बच्चे संक्रमण की जद में आए और पॉजिटिव हुए हैं। वही रांची जिले में 14 साल से 17 साल के उम्र की करीब 1300 लोग संक्रमित हुए हैं।

बच्चों की सुरक्षा जरूरी है

पीडियाट्रिशियन डाक्टर प्रतीक सिन्हा के मुताबिक कोरोना की आशंका तभी बनती है, जब सावधानी नहीं रखी जाए। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे अधिक संक्रमित होंगे, इसे लेकर अभी एक्सपर्ट ही एकमत नहीं हैं। वे भी यही दावा कर रहे हैं कि बच्चों की संख्या आनुपातिक तौर पर <स्हृद्द-क्तञ्जस्>यादा हो सकती है। दोबारा संक्रमण न हो इसके लिए जरूरी है, परिवार के सभी बड़े सदस्य घर में आवाजाही के दौरान बच्चों के सीधे संपर्क में न आने की आदत जरूर डालें। बच्चों को भीड़भाड़ वाली जगहों में जाने से बचाएं। घर परिवार के भीतर जो भी सदस्य वैक्सीनेशन के पात्र हैं वो जरूर टीका भी लगवाएं। साथ ही घर परिवार में कोरोना प्रोटोकॉल के पालन का अनुशासन घर के अंदर और बाहर बनाए रखें।

तीन प्रतिशत हो सकते हैं गंभीर

तीसरी लहर में झारखंड के करीब सात लाख बच्चों के कोरोना से संक्रमित होने का अनुमान है। रा<स्हृद्द-क्तञ्जस्>य में शून्य से 18 वर्ष के 1.43 करोड़ बच्चे हैं। अंदेशा है कि तीसरी लहर में इनमें से लगभग सात लाख 17 हजार बच्चे संक्रमित हो सकते हैं। इनमें भी 2.87 लाख सिम्पटोमैटिक हो सकते हैं। इनमें से लगभग तीन प्रतिशत बच्चों की स्थिति गंभीर होने का अंदेशा जताया गया है। यानी लगभग 8610 बच्चे ऐसे होंगे, जिन्हें आइसीयू में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है। स्वास्थ्य विभाग को इसके अनुरूप ही तैयारी करनी होगी। यह अनुमान स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों द्वारा तीसरे लहर को लेकर तैयार किये गये हैंडबुक में लगाया गया है। विभाग इस हैंडबुक को ही गाइडलाइन मानकर तैयारी करेगा।

तैयार किया जाएगा पीकू

स्वास्थ्य विभाग के आईइसी के नोडल पदाधिकारी सिद्धार्थ त्रिपाठी ने हैंडबुक के हाइलाइट्स के बाबत बताया कि सभी जिला अस्पतालों में पेडियाट्रिक्स आइसीयू (पीकू) की स्थापना की जानी है, जहां 10-10 बेड के पीकू होंगे। वहीं प्रत्येक कमिश्नरी के मुख्यालय यानी रांची, पलामू, हजारीबाग, पश्चिमी सिंहभूम, दुमका में 20-20 बेड के पीकू वार्ड बनेंगे। अस्पतालों में वेंटिलेटर थेरेपी, हाइ फ्लो नेजल कैनुला (एचएफएनसी) थेरेपी और कंटीन्यूस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपैप) थेरेपी की व्यवस्था करनी है। हर जिले में कम से कम दो वेंटिलेटर्स की स्थापना करनी है। हैंडबुक में सभी कर्मियों के प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है। डॉक्टर व नर्स को पीकू केयर की बेसिक ट्रेनिंग की अनुशंसा की गयी है। कोविड संक्रमण और इससे संबंधित बीमारियों के लिए सभी स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाना है। आयुष चिकित्सकों को भी कम्युनिटी विजिट और केस प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है।

रांची में 300 बेड बढ़ेंगे

कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए तैयारी शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से निजी और सरकारी अस्पतालों में बच्चों के लिए बेड बढ़ाने को कहा गया है। सरकार से मिले निर्देश के बाद सिर्फ रांची शहर के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में करीब 300 बेड बढ़ाए जा रहे हैं। इसको लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। बेड के अलावा जरूरी उपकरण की खरीदारी और स्वास्थ्य कर्मियों की ट्रेनिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

प्राइवेट अस्पतालों में भी तैयारी

रांची शहर के निजी अस्पतालों में बच्चों के लिए बेड बढ़ाये जा रहे हैं। मेडिका, ऑर्किड, राज, मेदांता, बालपन और रानी चिल्ड्रन में बेड की संख्या बढ़ेगी। वहीं सदर अस्पताल में बच्चों के लिए स्पेशल वार्ड तैयार किया जा रहा है, जिसमें 60 बेड हैं। क्रिटिकल केयर वार्ड में बच्चों के लिए 60 बेड रिजर्व रखने को कहा गया है। इसके अलावा मल्टीपार्किंग में बने 300 बेड भी रिजर्व रहेंगे.वहीं रिम्स में पहले से 50 बेड बच्चों के लिए हैं। रानी चिल्ड्रेन अस्पताल पूरी तरह से बच्चों के लिए डेडिकेटेड है। इसके अलावा रांची के बालपन अस्पताल में अलग से एक बिल्डिंग में एक्सटेंशन किया जा रहा है।