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PATNA : प्यार और प्यार, मुशायरा और मुशायरा. उर्दू शायरी के फनकारों ने मुशायरा जश्न-ए-बहार में शिरकत क्या की, अजीमाबाद की फिजा ही बदल कर रख दी. सियासत की गर्मी को अपनी आवाजों से ठंडक पहुंचने वाले ये अजीम-ओ-शान फनकार के दीवानों ने एसकेएम में अपनी उपस्थिति इस कदर दर्ज की कि आने वाला हर शख्स इस बहार में डूबता चला गया. वसीम बरेलवी, मंजर भोपाली सहित पाकिस्तान, जापान, तजाकिस्तान से आए उर्दू शायरों ने प्यार, सियासत की ऐसी तालीम दी कि दर्शक उसे भूले नहीं भूल सकते. तजाकिस्तान से आयी मिर्जा ने कहा कि मुझे सबसे निभाने की समझदारी नहीं आती, मैं जो दिखती हूं वहीं हूं, मुझे अदाकारी नहीं आती.