- मर्चेट चेंबर हॉल में किया गया 'कानपुर की घातक कथाएं-1' बुक का विमोचन, इसके बाद 'राम लाल निकल लिए..' में ठेठ कनपुरिया अंदाज ने दर्शकों को हंसा-हंसाकर किया लोटपोट

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रहा प्रोग्राम का मीडिया पार्टनर

kanpur : सैटरडे को मर्चेट चैम्बर हॉल में लेखक कैलाश नाथ पांडेय की कानपुरिया स्टाइल में लिखी गई बुक कानपुर की घातक कथाएं के फ‌र्स्ट पार्ट का विमोचन किया गया. साथ ही इसके एक पार्ट 'राम लाल निकल लिए..' का शानदार मंचन कर दर्शकों को खूब हंसाया. हर कानपुरिया डायलॉग पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाई. कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रहा. पुस्तक का विमोचन कैलाश नाथ पांडेय, मनोरमा पांडेय, रेनू शुक्ला, अजय शुक्ला, अरविंद बाजपेई, अम्बरीश तिवारी, आदित्य बाजपेई, धीर सिंह, मृदुल पांडेय आदि ने किया.

जीवन की सच्चाई दिखा गए

कहानी की शुरुआत होती है नाटक के कैरेटक्टर रामलाल की मौत के साथ. जहां उनकी पत्‍‌नी, बहू और बेटा रोना-पीटना मचाए हुए हैं. तभी खबर पाकर मोहल्ले के रहने वाले कई कैरेक्टर उनके घर के पास एकत्रित होने लगते हैं. एक ओर शव पड़ा हुआ है तो दूसरी ओर घर वालों से लेकर पड़ोसी तक अंतिम सस्कार के इंतजार में अपने अपने मतलब की बात कर टाइम पास कर रहे हैं. इसी दौरान लोगों की चटाखेदार बातें दर्शकों को जमकर हंसाती हैं. पंडित, हलवाई, छिछोरा लौंडा, खब्बू चाचा जैसे कई कैरेक्टर अपनी छाप छोड़ते हैं. तभी अचानक एडवोकेट बम बम पांडेय रामलाल की वसीयत पढ़ कर सुनाते हैं. अंत में बताते हैं कि रामलाल अपना शरीर मेडिकल कॉलेज को और अंग जरूरतमंदों को दान कर गए हैं. अपने घर में काम करने वाली महिला के बच्चों की ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई के लिए पैसे भी फिक्स करा गए हैं. ये सुनते ही हास्य के बीच दर्शकों की आंखें नम हो जाती हैं.