कानपुर (इंटरनेट डेस्क)। Kartik Purnima 2021: कार्तिक के महीने में आने वाली पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। यह दिन हिंदुओं के बीच एक विशेष दिन है जिसे बहुत जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस साल कार्तिक पूर्णिमा का शुभ दिन 19 नवंबर को मनाया जाएगा। दृक पंचांग के मुताबिक पूर्णिमा तिथि 18 नवंबर को दोपहर 12 बजे शुरू होगी और दूसरे दिन 19 नवंबर को दोपरह 02:26 बजे समाप्त होगी। खास बात यह है कि इस दिन ही साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। लोगों और क्षेत्र के आधार पर, हिंदू कैलेंडर में पूर्णिमा के दिन को पूर्णिमा, पूनम, पूर्णमी और पूर्णिमासी के रूप में भी जाना जाता है। वैष्णव परंपरा में कार्तिक मास को दामोदर मास के नाम से जाना जाता है। दामोदर भगवान कृष्ण के नामों में से एक है।

शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था

कार्तिक महीना सभी चंद्र महीनों में सबसे पवित्र महीना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा की तिथि को भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था, जिससे देवताओं को प्रसन्नता हुई और भगवान विष्णु ने शिव को त्रिपुरारी नाम दिया। इसलिए इस दिन को 'त्रिपुरारी पूर्णिमा' के रूप में भी जाना जाता है। त्रिपुरासुर के वध की खुशी में सभी देवता स्वर्ग से उतरते हैं और इस दिन काशी में देव दिवाली मनाते हैं। देव दिवाली आमतौर पर देवताओं की दिवाली के रूप में जाना जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। हालांकि यदि कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान करना संभव न हो तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर घर पर ही स्नान कर सकते हैं। मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन गंगा जल से स्नान करने से पूरे साल गंगा स्नान करने का फल मिलता है। इसके साथ ही पापों से मुक्ति मिलती और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।