चुनाव आयोग से अनुमति के बाद जवाहर पंडित हत्याकांड के आरोपी भेजे गए मिर्जापुर जेल

मंगलवार को भोर में डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन की छापेमारी में मिली थी संदिग्ध सामग्री

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ALLAHABAD: पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष की हैसियत रखने वाले करवरिया बंधुओं की बुधवार को प्रशासन ने नैनी सेंट्रल जेल से विदाई करा दी. निर्वाचन आयोग से अनुमति लेकर की गई इस कार्रवाई के पीछे मंगलवार को जेल के औचक निरीक्षण में आपत्तिजनक स्थितियां मिलना बताया जा रहा है. करवरिया बंधु फिलहाल मिर्जापुर जेल में रहेंगे. बुधवार की देर शाम उन्हें यहां से विदा भी कर दिया गया. हालांकि आफिशियली यही बताया जा रहा है कि सुरक्षा कारणों के चलते ऐसा किया गया है.

जवाहर पंडित हत्याकांड के आरोपी

बता दें कि करवरिया ब्रदर्स यानी पूर्व सांसद कपिल मुनी करवरिया, पूर्व विधायक उदय भान करवरिया और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष व पूर्व एमएलसी सूरजभान करवरिया का नाम जवाहर पंडित हत्याकांड में आरोपी के तौर पर सामने आया था. इस मामले में पिछले साल ही सूरजभान और कपिलमुनी ने कोर्ट में सरेंडर किया था. उदयभान पहले से ही जेल में हैं. डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है. राजनीति में सक्रिय तीनो भाइयों ने इसके बाद जमानत पर जेल से बाहर आने का काफी प्रयास किया. सूरजभान को कौशांबी के एक मामले में जमानत मिल भी गई लेकिन जवाहर पंडित हत्याकांड के चलते कोई बाहर नहीं आ सका.

आपत्तिजनक स्थिति में मिले थे

मंगलवार को डीएम और एसएसपी ने नैनी सेंट्रल जेल का औचक निरीक्षण किया था. इस दौरान तमाम खामियां पकड़ में आई थीं. पता चला कि करवरिया बंधुओं को यहां विशेष सुविधाएं उपलब्ध हैं. जेल में लगे सभी जैमर बंद मिले थे और करवरिया बंधुओं के फोन पर बाहर बात करने के भी संकेत मिले थे. इसकी रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को भेजी गई थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने करवरिया भाईयों को मिर्जापुर जेल स्थातंरित करने के प्रस्ताव को ग्रीन सिग्नल दे दिया.

चुनाव में गड़बड़ी की आशंका

बता दें कि वर्तमान समय में चल रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उदयभान करवरिया की पत्‍‌नी नीलम करवरिया को मेजा सीट से भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है. सूत्रों का कहना है कि उदयभान पत्‍‌नी को इस सीट से विजयश्री दिलाने के लिए जेल के भीतर से ही सेटिंग कर रहे हैं. वह फोन पर कॉल करते हैं. इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग को भी की गई थी कि वह निष्पक्ष मतदान को प्रभावित कर रहे हैं. माना जा रहा है कि पहले छापा और फिर उनके यहां से स्थानान्तरण की कार्रवाई इसी के आधार पर की गई है.

चुनाव आयोग से करवरिया भाईयों को नैनी जेल से अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की अनुमति के बाद मिर्जापुर जेल स्थानांतरित किया गया है. इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था.

केदार नाथ, जेल अधीक्षक, नैनी जेल