जहरीला चिकन खाने से एक लड़की के दिमाग को हुए नुकसान के मामले में यह फैसला दिया गया है. मोनिका समान ने 2005 में सिडनी के पास केएफसी के एक रेस्त्रां में “ट्विस्टर” नाम की डिश खाई जिसके बाद वह बीमार पड़ गईं. उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि वह चलने फिरने और बोलने के भी काबिल नहीं रहीं. केएफसी ने कहा कि वह अदालत के फैसले से बहुत ही निराश है और इसके खिलाफ अपील करेगा.

'पूरी नहीं की जिम्मेदारी'

न्यू साउथ वेल्स राज्य की सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने 80 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के हर्जाने का फैसला दिया. पिछले महीने अदालत ने कहा कि केएफसी ने लड़की की देखभाल करने की अपनी जिम्मेदारी को पूरा नहीं किया.

मोनिका के परिवार वालों ने अदालत के फैसले पर राहत जताई है. उनके वकील जॉर्ज व्लाहाकिस ने कहा, “मोनिका के दिगाम को हुए अत्यधिक नुकसान और उसकी वजह से उनके अपाहिज होने के कारण उनके परिवार के सीमित संसाधन पहले ही खत्म हो चुके हैं. मोनिका अब बड़ी हो चुकी हैं और उनके परिवार के लिए उनकी और उनसे छोटे भाई-बहनों की परवरिश करना बहुत ही मुश्किल साबित हो रहा है. इस मुआवजे की बहुत जरूरत थी. अभी तक तो केएफसी यही कहता रहा है कि मोनिका को एक पैसा भी नही दिया जाएगा.”

फैसले पर नाराजगी

केएफसी ने अदालत के फैसले पर हैरानी जताई है और उन सबूतों पर जोर दिया है कि जो दिखाते हैं कि मोनिका उसकी वजह से अपाहिज नहीं हुई हैं. उसने अदालत के फैसले खिलाफ अपील करने का संकेत दिया है.

कंपनी के एक मैनेजर ने कहा, “हमें मोनिका और समान परिवार के लिए बहुत दुख है. लेकिन हमारी जिम्मेदारी केएफसी की प्रतिष्ठा का बचाव करना भी है जो सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला खाना देने के लिए जाना जाता है.”

समाचार एजेंसी एपीपी की खबर के मुताबिक अदालत को बताया गया कि केएफसी रेस्त्रां में खाना खाने के बाद उनके माता पिता और भाई को उल्टी होने लगी और दस्त भी हो गए. परिवार के बाकी लोग तो कुछ समय बाद ठीक हो गए लेकिन मोनिका छह महीने तक कोमा में रहीं.

समान परिवार के वकील ने अदालत को बताया कि रेस्त्रां में जब भीड़ ज्यादा होती है तो फर्श पर गिरे चिकन को भी ग्राहकों को परोस दिया जाता है.

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