- शहर के स्कूलों में फॉलो नहीं हो रही गाइड लाइन

- भारी बस्ता लटकाकर स्कूल जा रहे लाडले

GORAKHPUR: शहर में धड़ल्ले से स्कूल अपनी मनमानी कर रहे हैं और आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इन पर लगाम लगाने के लिए कोई तैयार नहीं है. जिससे बात कीजिए वह यही कहता है कि ये मेरा काम नहीं है. इसलिए बे-रोकटोक शहर के अंदर चल रहे स्कूलों की मनमानी का दबाव बच्चे झेल रहे हैं. स्कूलों की मनमानी का एग्जांपल बच्चों की पीठ पर टंगा भारी बैग भी है. जिसे हर दिन सुबह-सुबह छोटे-छोटे बच्चों को ढोते आप देख सकते हैं. आलम ये है कि कम एज में भारी बस्ता बच्चों को बीमार बना रहा है. ऐसा हम नहीं बच्चों के पैरेंट्स और डॉक्टरों का कहना है. भारी बस्ते के शिकार स्टूडेंट कम एज में ही कमर दर्द, कंधे का दर्द झेल रहे हैं. इस शिकायत को लेकर वे बार-बार डॉक्टर के पास भी पहुंच रहे हैं लेकिन स्कूल के जिम्मेदार हैं कि उन्हें इन मासूमों की तकलीफ नजर ही नहीं आती.

पैरेंट्स ने बयां किया दर्द

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट द्वारा भारी बस्ता कैंपेन चलाया जा रहा है. इसमें दैनिक जागरण आई नेक्स्ट टीम शहर के स्कूलों के बाहर बैग और बच्चे का वजन भी कर रही है. इसी दौरान टीम से कई पैरेंट्स ने अपना दर्द बयां किया. एक पैरेंट का कहना था कि उनका बच्चा आठवीं क्लास में पढ़ता है. उसका बैग इतना भारी है कि उसकी पीठ टेढ़ी हो गई है. इसके बाद टीम ने भी उनके बच्चे के बैग का वेट किया तो उसे देखकर हर देखने वाला हैरान हो गया. बच्चे के स्कूल बैग का वेट 13 किलो निकला. उनका ये भी कहना था कि अब मै अपने बच्चे की पीठ सीधा करने की दवा करा रहा हूं.

टेढ़ी हो रही रीढ़ की हड्डी

भारी बस्ते का बच्चे की सेहत पर क्या असर पड़ रहा है इस बारे में जानने के लिए टीम फेमस हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल श्रीवास्तव के पास पहुंची. डॉ. अनिल ने बताया कि इधर स्कूल जाने वाले कई छोटे बच्चे रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होने की प्रॉब्लम लेकर उनके पास पहुंच रहे हैं. इस प्रॉब्लम का जिम्मेदार बच्चों का भारी बैग है. भारी बस्ते की वजह से बच्चों में कम एज में ही पीठ दर्द, पैर के तालू में दर्द, रात में कमर दर्द, पीठ का एक तरफ घूम जाना आदि की शिकायत देखने को मिल रही है.

स्कूलों रखें एक्सरसाइज ट्रेनर

डॉक्टर ने बताया कि स्कूल जाने वाले बच्चों को कैल्शियम की दवा अवश्य दें. स्कूल मैनेजमेंट भी इस बात पर ध्यान दें कि अधिक से अधिक किताबों को स्कूल में ही रखा जाए. जिससे बच्चे के ऊपर ज्यादा भार ना आए. वहीं पढ़ाई के साथ ही व्यायाम पर भी स्कूल ध्यान दें और बकायदा इसके लिए ट्रेनर रखें.

कोट्स

बच्चे की सेहत कमजोर होती चली जा रही है. उसके भारी बस्ते की वजह से उसको कंधे में दर्द की शिकायत भी आती रहती है. फिलहाल डॉक्टर ने कैल्शियम खिलाने पर जोर देने को कहा है.

मनु शंकर, पैरेंट

बच्चा जब स्कूल से आता है तब आए दिन पीठ में दर्द की शिकायत करता है. फिर उसकी अच्छे से मालिश की जाती है. कभी-कभी तो दवा भी देनी पड़ जाती है.

राजेश कुमार, पैरेंट

स्कूल तो सब अच्छे हैं लेकिन उनको भी ये समझना चाहिए कि बच्चे की ज्यादातर किताबें अपने पास रखे. जिससे बच्चे को इतनी कम एज में ज्यादा भार ना आए.

वरुण त्रिपाठी, पैरेंट

बस्ता उठाने की वजह से मेरे बच्चे के कंधे पर निशान पड़ गया था. अब तो मै खुद ही बच्चे को स्कूल तक छोड़कर आती हूं.

दीपा, पैरेंट

वर्जन

बच्चों के साथ लापरवाही अच्छी बात नहीं है. इतनी कम ऐज में बच्चे कमर दर्द, कंधा दर्द और रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होने की शिकायत आ रही है.

- डॉ. अनिल श्रीवास्तव, हड्डी रोग विशेषज्ञ