- पुलिस ने नहीं किया पीडि़तों का पैसा बरामद

- पीडि़त कर रहे पैसे वापस मिलने का इंतजार

देहरादून, सिटी में किटी फ्रॉड की मानो बाढ़ आ रखी हो, आए दिन किटी के नाम पर लोगों की गाढ़ी कमाई लुट रही है. पिछले दिनों जब एक के बाद एक दर्जनों मामले सामने आए तो पब्लिक और पुलिस हेडक्वार्टर के दबाव पर पुलिस ने 6 मामलों में 9 किटी संचालकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा, लेकिन ठगी का एक भी रुपया पुलिस उन से बरामद नहीं कर पाई. पैसे की बरामदगी के लिए पुलिस ने ठगी के आरोपियों के बैंक अकाउंट्स तक नहीं खंगाले न ही संपत्ति सीज करने की जरूरत नहीं समझी. पब्लिक अपने पैसे के लिए थाना-चौकियों के चक्कर काट रही है, लेकिन पुलिस को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.

6 मामले, 9 अरेस्ट, 50 करोड़ से ज्यादा ठगी

लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर किटी के नाम पर ठगने वालों ने दूनाइट्स को करोड़ों का चूना लगाया है. सिर्फ 6 मामलों की ही बात की जाए जिनमें पुलिस ने अभी तक 2 दंपति सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया है, तो इनमें 50 करोड़ से ज्यादा की रकम किटी संचालक हड़प चुके हैं. ये आरोपी भले ही जेल में हों, लेकिन ठगी की रकम में से एक रुपया तक पुलिस बरामद नहीं कर पाई है, न ही इसका कोई पुख्ता सुराग पता कर पाई है. ऐसे में पुलिस को आरोपियों की संपत्ति सीज करनी चाहिए थी, बैंक अकाउंट खंगालने चाहिए थे और जरूरत पड़ने पर आरोपियों की संपत्ति कुर्क कर ठगी की रकम वसूलनी चाहिए थी, लेकिन पुलिस सिर्फ इन्हें गिरफ्तार करके ही अपना कंधा खुद थपथपा रही है.

कहां गई ठगी की रकम

पुलिस का दावा है कि आरोपियों के बैंक खाते खंगाले गए हैं, कुछ खाते सीज भी किए गए हैं. लेकिन, अधिकांश खातों में इतनी रकम ही नहीं है. आरोपियों की ओर से पैसे लौटाने के लिए दिए गए कई चेक भी बाउंस हुए थे. जाहिर, है बैंक खातों में पैसे न होने के चलते ऐसा हुआ. तो फिर ठगी की रकम का ट्रांजेक्शन कहां हुआ. इसका पुलिस पता नहीं लगा पाई है.

पीडि़तों को ही जिम्मेदार बता रही पुलिस

किटी फ्रॉड के मामलों में पुलिस सीधे-सीधे उन लोगों को ही जिम्मेदार बता रही है, जो किटी के लालच में आकर अपनी जीवन की कमाई गंवा चुके हैं. ये बात काफी हद तक ठीक भी है, लेकिन ठगी के मामलों पर लगाम लगाना भी तो पुलिस का ही काम है, ऐसे में पीडि़तों पर आरोप लगाकर पुलिस अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती.

किटी संचालकों के सहयोगी फरार

पुलिस ने 9 लोगों को भले ही गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन इनके दर्जनों सहयोगी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं. कई का पुलिस अब तक कोई सुराग नहीं जुटा पाई है. इन लोगों के खिलाफ अलग-अलग थानों में केस दर्ज हैं.

कितनी रकम किसने ठगी

केस वन (10 करोड़ की ठगी)

ऊं सांई के नाम से भावना शर्मा और अजय शर्मा 12 किटी चलाते थे. सैकड़ों लोगों के करीब 10 करोड़ रुपए लेकर फरार हो गए थे. दोनों को पुलिस ने अरेस्ट कर जेल भेज दिया है.

केस टू (50 करोड़ की ठगी)

बाला जी नाम से साहिबा जैन और निशांत जैन कई किटी चलाते थे. सैकड़ों लोगों का करीब 50 करोड़ डकार कर दोनों फरार हो गए थे. दोनों जेल में हैं.

केस थ्री (एक करोड़ ठगे)

हरे कृष्णा नाम से सोनिया मिड्डा नाम की महिला किटी चलाती थी. सैकड़ों लोगों से करीब एक करोड़ रुपए ठग लिए.

केस फोर (1.5 करोड़ की ठगी)

सांई किटी नाम से गुंजन और संदीप किटी संचालन का काम करते थे. दोनों ने सैकड़ों लोगों से करीब डेढ़ करोड़ रुपए हड़प लिए थे.

केस फाइव (5 करोड़ की ठगी)

सुखमनी नाम से पूनम कौर किटी का संचालन करती थी. सैकड़ों लोगों को पांच करोड़ का फटका लगाने के बाद फरार हो गयी थी.

केस सिक्स (4 लाख की ठगी)

सुनीता खत्री फाइव स्टार नाम से किटी संचालन का काम करती थी. कई लोगों से करीब 4 लाख रुपए लेकर फरार हो गयी थी.

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आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ ही उनके अकाउंट सीज किए गए हैं. विवेचना की जा रही है. आरोपियों के बयान में सामने आया कि पीडि़त भी कई पार्टियों में शामिल रहे. कुछ पैसा आरोपियों ने लौटा भी दिया है.

श्वेता चौबे, एसपी सिटी