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PATNA: बिहार के कोसी और सीमांचल के जिलों के गांव और शहर में नदियां उफनने से बाढ़ का पानी कहर ढा रहा है. रविवार की सुबह मधुबनी में 7 और दरभंगा में 4 जगहों पर तटबंध टूट गए. इससे दर्जनों गांवों में पानी घुस गया है. विभिन्न जगहों पर 23 लोग डूब गए. एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश रविवार को थोड़ी थमी, लेकिन कोसी-सीमांचल के लोगों की मुसीबत शुरू हो गई है. सुपौल से कोसी ने विकराल रूप धारण कर लिया है. शनिवार रात को कोसी बराज के सभी 56 फाटक खोले जाने के कारण सुपौल-सहरसा के लगभग 12 दर्जन गांव जलमग्न हो गए थे. अब सुपौल-सहरसा में तो कोसी घट रही है, लेकिन बराज से निकला पानी कटिहार में कोसी के जलस्तर को बढ़ा रहा है. जिन गांवों में पानी घुस गया है, वहां के लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में बाहर निकल रहे हैं.

दो हजार घरों में पहुंचा पानी

मुजफ्फरपुर जिले में बागमती नदी का जलस्तर स्थिर रहने के बावजूद कटरा व औराई में बाढ़ की स्थिति नाजुक बनी है. दो हजार घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. पूर्वी चंपारण के नए इलाकों में पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है. यहां डूबने से 8 की मौत हो गई है. मधुबनी में कमला बलान व धौस नदी का तटबंध टूटने से जिले में त्राहिमाम है. कमला बलान तटबंध रखवारी, गोपलखा एवं नरूआर में रविवार सुबह टूट गया. दो दर्जन गांवों में पानी फैल गया है. पांच घंटे बाद डीएम व सांसद के पहुंचने पर लोगों ने आक्रोश प्रगट किया. सांसद को घंटों बंधक बनाए रखा. अधवारा समूह की धौंस नदी का सुरक्षा बांध रविवार को तीन जगहों पर टूट गया. लदनियां में बाढ़ के पानी में डूबने से एक की मौत हो गई. मनीगाछी के कटमा में बाढ़ में फंसे बच्चों को बचाने के क्रम में डूबने से एक युवक की मौत हो गई.

अब सीतामढ़ी शहर पर खतरा

सीतामढ़ी जिले में बाढ़ का कहर जारी है. शनिवार को सुप्पी प्रखंड के परसा में बागमती तटबंध टूटने के बाद इलाका जलमग्न था. सीतामढ़ी-पुपरी पथ में बाजपट्टी में बहाव जारी है. पीरगाछी निवासी सादिक के 8 वर्षीय पुत्र असलम की डूबने से मौत हो गई.

बाढ़ पीडि़तों ने जाम किया हाईवे

गढि़या वार्ड संख्या आठ में शनिवार रात सुरक्षा बांध टूटने से आक्रोशित लोगों ने रविवार दोपहर को नेशनल हाईवे जाम कर दिया. बांध टूटने के कारण लोगों के घरों में पानी घुस गया है. लोग प्रदर्शन कर मुआवजे की मांग कर रहे थे. इस जाम के कारण हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई. जाम करने वालों का कहना था कि सुरक्षा बांध के टूट जाने के बाद उन लोगों के घरों में एक दाना तक नहीं बचा है. कपड़े व बर्तन भी डूब गए हैं. पानी घुसने के करीब 12 घंटे बीतने के बाद भी प्रशासन द्वारा कोई सहायता नहीं भेजी गई.