भागवत कथा के तीसरे दिन प्रयागराज के महिमा की चर्चा की

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PRAYAGRAJ: संगमनगरी प्रयागराज में कुंभ के दौरान एक तरफ जहां आस्था की डुबकी लग रही है. वहीं जगह-जगह विभिन्न शिविरों में ज्ञान की गंगा भी बह रही है. विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के शिविर में देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने भागवत कथा सुनाने के साथ ही प्रयागराज के महिमा की चर्चा की.

साधारण नहीं है अक्षयवट
तीसरे दिन कथा की शुरुआत करते हुए देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने कहा कि प्रयाग की पावन भूमि पर मां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का दर्शन हो रहा है. माधव के समान कोई देवता नहीं है. गंगा के सामान कोई दूसरी नदी नहीं है और त्रिवेणी के सामान सदृश कोई दूसरा क्षेत्र नहीं है. यहां माधव भगवान के दर्शन होते हैं. अक्षयवट के दर्शन होते हैं. कई वर्षो तक अक्षयवट से लोगों को दूर रखा गया. ये अक्षयवट साधारण नहीं है. आप इसके तत्व को और महत्व को समझिये.

तो भागवत का करें श्रवण
प्रयागराज की चर्चा करने के साथ ही देवकीनंदन ठाकुर ने भागवत कथा को आगे बढ़ाते हुए राजा परीक्षित को श्राप लगने की कथा को आगे बढ़ाया. कहा कि राजा परीक्षित को पता चला कि सातवें दिन सांप के डंसने से उनकी मुत्यु हो जाए. उन्होंने उसी क्षण अपना महल छोड़ दिया. अपना सर्वस्व त्याग कर दिया. अपनी मुक्ति का मार्ग खोजने निकल पड़े. शुकदेव महाराज ने परीक्षित को बताया था कि जिस व्यक्ति की मृत्यु सातवें दिन है, उसको श्रीमद भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए. उसका कल्याण निश्चित है. श्रीमद भागवत में 18000 श्लोक, 12 स्कन्द और 335 अध्याय है जो जीव सात दिन में सम्पूर्ण भागवत का श्रवण करेगा वो अवश्य ही मनोवांछित फल की प्राप्ति करता है.