-आज है मजदूर दिवस

-सरकारी फाइलों में रजिस्टर्ड हैं ईस्ट सिंहभूम के दो लाख मजदूर

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JAMSHEDPUR: एक मई को मनाए जाने वाले विश्व मजदूर दिवस के बारे में ईस्ट सिंहभूम के असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को जानकारी नहीं है. मजदूरों के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में भी उन्हें कुछ पता नहीं है. उन्हें तो बस काम करने और मजदूरी लेने से मतलब है. मजदूरों ने कहा कि उनके लिए हर दिन एक समान है. रोज कमाना और खाना ही उनकी ि1नयति है.

ना में हिलाया सिर

एमजीएम हॉस्पिटल में चल रहे निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को नहीं मालूम कि मजदूर दिवस क्या होता है. जब उन्हें इसके बारे में बताया गया तो उनका जवाब था 'एक दिन छुट्टी पर रहेंगे, तो घर का चूल्हा कैसे जलेगा?' श्रम विभाग की ओर से चलाई जा रही राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) के बारे में उनसे पूछा गया तो उन्होंने ना में सिर हिला दिया. आरएसबीवाई के तहत असंगठित क्षेत्र के सभी मजदूरों को स्मार्ट कार्ड उपलब्ध कराना है. इस कार्ड से आकस्मिक स्थिति या बीमार होने पर मजदूर निजी और सरकारी अस्पतालों में फ्0 हजार रुपए तक का मुफ्त इलाज करा सकते हैं. श्रम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक ईस्ट सिंहभूम में आठ प्राइवेट हॉस्पिटल श्रम विभाग से संबद्ध हैं. उपश्रमायुक्त एसएस पाठक के मुताबिक जिले में दो लाख मजदूर आरएसबीवाई से निबंधित हैं. श्रम विभाग की ओर से जारी स्मार्ट कार्ड के जरिए करीब दो लाख मजदूर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं.

आमी जानी ना मजदूर दिवस. काल के काज करबो. काज ना करले तो खाबो की.

-जुलपुकी सिंह

मजदूर दिवस के बारे में नहीं मालूम. सभी दिन बराबर है. जीने के लिए काम जरूरी है. छुट्टी मनाने से क्या मिलेगा.

-सरस्वती

हमें भगवान ने मजदूरी के लिए बनाया है. काम करने से ही घर चलेगा. बिना मजदूरी के घर में चूल्हा कैसे जलेगा.

श्रीमती सिंह

मजदूरों के लिए न तो सरकार और न ही बाबू लोग कुछ करते हैं. ख्0 साल से मजदूरी कर जीवन बसर कर रहा हूं.

-सोयतन महतो