कृषि शिक्षा के लिए अधिग्रहित भूमि को कानून का उल्लंघन कर यीशू दरबार ट्रस्ट को किया ट्रांसफर

परिवारवाद के वर्चस्व के लिए लाल ब्रदर्स ने शुरू की धर्म विशेष की गतिविधियां

vikash.gupta@inext.co.in

ALLAHABAD: सैम हिग्गिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेस (पूर्व में एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट) नैनी में स्थापित यीशू दरबार अक्सर सवालों के घेरे में रहा है. इस पर आरोप लगते रहे हैं कि यहीं से धर्मान्तरण के खेल को अंजाम दिया जाता रहा है. इसी क्रम में एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट पदाधिकारियों द्वारा किए गए भूमि घोटाले की जांच की गई तो यीशू दरबार का भी सच सामने आ गया. एसडीएम करछना राजा गणपति आर की जांच में यीशू दरबार की जमीन पर गंभीर सवालिया निशान लगाए गए हैं.

ताकि बनी रही अपनी पैठ

एसडीएम करछना की जांच में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट सोसाइटी के सचिव प्रो. आरबी लाल, उनके भाई विनोद बी. लाल व एसबी लाल, पत्‍‌नी सुधा लाल, बेटे, बहु आदि ने संस्थान में अपने वर्चस्व को कायम रखने के लिए न केवल पद का दुरूपयोग किया, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी वंशवाद को हावी रखने के लिये जमीनों को हड़पने, उनका स्वरूप बदलने और उन्हें बेचने के खेल को समय-समय पर अंजाम दिया. जांच रिपोर्ट से साफ है कि लाल ब्रदर्स अपने कुकृत्यों को छिपाने के लिए धर्म की आड़ लेने से भी नहीं चूके.

सरकार के अनुदान का दुरूपयोग

लाल ब्रदर्स ने यीशू दरबार ट्रस्ट की स्थापना की और अधिग्रहण कानून का माखौल उड़ाते हुए भूमि के कई भाग पर अवैध कब्जा करवाया. राजस्व टीम ने जांच में साफ-साफ कहा है कि कृषि शिक्षा के लिए सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि पर धर्म विशेष की गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है. जांच अधिकारियों द्वारा सौंपी रिपोर्ट में कहा गया है कि एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट के पदाधिकारी केन्द्र और राज्य सरकार से प्राप्त अनुदानों की गलत तरीके से बंदरबांट कर रहे हैं.

26 बीघा भूमि का बदला मालिकाना रिकार्ड

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- प्रो. राजेन्द्र बिहारी लाल ने वर्ष 2003 में यीशू दरबार ट्रस्ट की स्थापना की

- इसे कानूनी जामा पहनाने के लिए एग्रीकल्चर सोसाइटी का धर्म दर्शन डिपार्टमेंट बताने की साजिश रची

- जबकि यीशू दरबार के लिए अधिग्रहित भूमि के कई भाग पर अवैध निर्माण कर कब्जा किया गया है

- यही नहीं यीशू दरबार ट्रस्ट के लिए एग्रीकल्चर सोसाइटी से प्रस्ताव पास करके एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट के नाम दर्ज 26 बीघा भूमि को आवंटित कर दिया गया

- जिस जगह पर यीशू दरबार संचालित किया जाता है, वहां आराजी संख्या 131, 132, 133, 134, 135, 30 एवं 31 मौजा महेवा पट्टी पूरब परगना अरैल तहसील करछना पर बाउंड्रीवाल बनाकर कब्जा है

- इसी भूमि पर धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. जबकि यह भूमि वर्ष 1911 में सरकार द्वारा कृषि कॉलेज और शिक्षा के लिए अधिग्रहित है

- शुआट्स में करारनामा की शर्तो का पूरी तरह से खुला उल्लंघन किया जा रहा है

- अवैध जमीन पर संचालित यीशू दरबार की बावत राजस्व टीम ने पूरी रिपोर्ट सरकार को भी सौंपी है