10 मई 1857 प्रथम स्‍वतंत्रता संग्राम के वो तीन द‍िन जब मेरठ में मह‍िलाएं बोल उठीं 'हथियार हमें दो तुम चूड़ि‍यां पहनकर बैठो'

2018-05-10T15:12:07Z

10 मई की तारीख भारत के इत‍िहास में एक खास द‍िन है। 1857 में भारत के प्रथम स्‍वतंत्रता संग्राम में मेरठ से ब‍िगुल फूंकने वाले मंगल पांडे का नाम व‍िशेष रूप से ल‍िया जाता है। बता दें क‍ि 10 मई को मेरठ से सदर बाजार की वेश्याओं समेत तमाम मह‍िलाएं भी हथ‍ियार उठाने में पीछे नहीं रही थीं

बगावत का झंडा लेकर दिल्ली कूच किया
कानपुर। राजकीय संग्रहालय मेरठ के संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार गौतम ने 2016 में आईनेक्स्ट से बातचीत में मेरठ और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के खास तथ्य शेयर किए थे। डॉ. मनोज कुमार के मुताबिक पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में मंगल पांडे और इसूरी पांडे को फांसी के बाद सुलगी चिंगारी मेरठ में ज्वाला बनी थी। 10 मई 1857 मेरठ के तीनों रेजीमेंट के बहादुर सिपाहियों ने खुली बगावत का झंडा उठाकर दिल्ली कूच किया था। इसमें महिलाओं ने भी सहयोग किया था। श्रीमती आशा देवी गुर्जर-पति सैनिक विद्रोह में शामिल थे तो आशा ने महिलाओं की टोलियां बनाकर 13 और 14 मई को कैराना और शामली की तहसील पर हमला बोल दिया था।
तुम चूडियां पहनकर घरों में बैठो
इसके अलावा बख्ताबरी देवी, भगवती देवी त्यागी, हबीबी खातून गुर्जर, शोभा देवी ब्राह्मामणी, मामकौर गडरिया, भगवानी देवी, इंदरकौर जाट, जमीला पठान आदि सहित मेरठ-मुजफ्फरनगर की 255 महिलाएं फांसी चढ़ी। कुछ लड़ते-लड़ते शहीद हुई। असगरी बेगम को तो पकड़कर जिंदा जला दिया था। इतना ही नहीं मेरठ सदर बाजार की वेश्याओं ने 85 सैनिकों की गिरफ्तारी के बाद कहा था कि 'लाओ अपने हथियार हमें दो हम जंग करके उन बहादुर सिपाहियों को जेल से अपने आप आजाद करा लेंगे, तुम चूड़ियां पहनकर घरों में बैठो।'

इतिहास के वो तीन दिन थे खास

9 मई 1857 की सुबह परेड ग्राउंड पर मेरठ की तीनों रेजीमेंट के सिपाहियों के सामने कारतूस लेने से इनकार करने वाले तीसरी अश्वसेना के 85 सिपाहियों का कोर्ट मार्शल कर दिया गया। जानबूझकर हजारों सैनिक इस घटना के दौरान मूक बने रहे। सिपाहियों को अपमानित करने के बाद विक्टोरिया पार्क स्थित जेल में भेज दिया गया।
85 सिपाहियों को जेल से मुक्त कराया
10 मई की शाम 5 बजे गिरजाघर घंटा बजता है। इसके बाद 6:30 बजे इन्हीं सिपाहियों ने अपने साथी 85 सिपाहियों को जेल से मुक्त कराया। ब्रिटिश सेना के प्रतीकों को हिंसा और आगजनी का शिकार बनाया। इस दौरान कई गोरों की हत्या कर दी गई। सिपाहियों की कई टोलियां पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत 'दिल्ली चलो' अभियान को अंजाम देती हुई दिल्ली पहुंच गईं।
14 मई को दिल्ली पर क्रांतिकारियों का कब्जा
11 मई की सुबह सैनिक मेरठ से बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचे। यहां बहादुर शाह का फरमान ब्रिटिश अधिकारियों को दिया गया कि वे दिल्ली के शस्त्रागार को शाही सेना के सुपुर्द कर दें। मारो फिरंगी अभियान के बाद 14 मई को दिल्ली पर क्रांतिकारियों का कब्जा हो गया। इस तरह से 10 मई 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में एक खास दिन बन गया था।

 


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