10 डकैतों की रोचक कहानी कोई फौजी तो कोई डॉक्‍टरी छोड़ बना बागी

2015-12-11T13:17:41Z

मध्‍यप्रदेश के चंबल शिवुपरी मुरैना चित्रकूट रीवा के इलाकों में कई दशकों तक डाकुओं का खौफ रहा है। बताया जाता है ये पहले दस्‍यु बागी कहलाते थे और इनका काम सिर्फ डकैती करना था। धीरेधीरे पैटर्न बदलता गया और इन डाकुओं ने अपहरण का काम शुरु कर दिया। ये राजनीति और जमीन झगड़ों के निपटारे में लग गए। तो आइए बात करते हैं डकैत मान सिंह ददुआ और पानसिंह तोमर जैसे 10 बड़े नाम हैं जिन्‍होंने पूरे क्षेत्र में आतंक फैलाया।


1. मलखान सिंह :-

डाकू मलखान सिंह ने अपने गांव के सरपंच पर आरोप लगाया था कि उसने मंदिर की जमीन हड़प ली। मलखान ने जब इसका विरोध किया तो सरपंच ने उसे गिरफ्तार करवा दिया और उसके एक मित्र की हत्या करवा दी। यह बात मलखान को रास नहीं आई और उसने राइफल उठा ली और खुद को बागी घोषित कर दिया। इसके बाद मलखान धीरे-धीरे बड़ा डाकू बन गया। हालांकि बाद में उसने सरेंडर भी कर दिया था।
2. पान सिंह तोमर :-
डाकुओं की इस लिस्ट में पान सिंह तोमर का नाम सबसे ज्यादा चर्चित है। पान सिंह तोमर पर एक फिल्म भी बन चुकी है। बताते हैं कि डकैत बनने से पहले पान सिंह सेना में सूबेदार के पद पर तैनात थे। वह सात सालों तक लंबी बाधा दौड़ में राष्ट्रीय चैंपियन भी रहा। तोमर ने जमीनी विवाद के बाद अपने रिश्तेदार बाबू सिंह की हत्या कर दी और खुद को बागी घोषित कर दिया। हालांकि बाद में 60 सदस्यीय पुलिस दल के साथ हुई मुठभेड़ में 10 साथियों के साथ मारा गया।
3. फूलन देवी :-
फूलन देवी के डाकू बनने के पीछे हमारा समाज ही जिम्मेदार है। रेप का बदला लेने के लिए फूलन देवी को 16 साल की उम्र में ही डाकू बनना पड़ा। फूलन के साथ जिन 22 लोगों ने बालात्कार किया था, उन्हें एक लाइन में खड़ाकर गोली मार दी। हालांकि इसके बाद साल 1983 में उसने सरेंडर कर दिया था। जेल से छूटने के बाद वह राजनीति से जुड़ गईं। मिर्जापुर से वह दो बार सांसद भी रह चुकी हैं। 2001 में फूलन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
4. मान सिंह :-
मान सिंह ने साल 1935 से लेकर 1955 के बीच तकरीबन 1,112 डकैती को अंजाम दिया था। उसने 182 हत्यांए की जिसमें 32 पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। साल 1955 में सेना के जवानों ने मान सिंह और उसके पुत्र सूबेदार सिंह की गोली मारकर हत्या की दी थी।
5. शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ :-
शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ ने 16 मई 1978 को 22 साल की उम्र में पहली हत्या की थी। साल 1986 में ददुआ ने एक व्यक्ित को पुलिस का मुखबिर बता हत्या कर दी। उसने 9 अन्य लोगों की भी निर्ममता से हत्या कर दी थी। 22 जुलाई 2007 को ददुआ अपने गिरोह के अनय सदस्यों के साथ पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
6. माथो सिंह :-
1960-70 के दशक में चंबल के बीहड़ों में इसका आतंक चलता था। 23 मर्डर 500 किडनैपिंग करने वाले इस डकैत ने 500 साथियों के साथ जयप्रकाश नारायण के सामने सरेंडर किया था। माथो सिंह खुद को बागी मानता था। वह ज्यादातर अमीरों के घर पर डैकती डालता था।
7. सीमा परिहार :-
13 साल की आयु में डकैत लाला राम और कुसुमा नाइन ने उसका अपहरण कर लिया था। जिसके बाद सीमा ने भी डाकू बनने का मन बना लिया था। सीमा परिहार ने 70 लोगों की हत्यांए की और 200 लोगों का अपहरण किया। साल 2000 में उसने यूपी पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया। राजनीति में हाथ अजमाने के सीमा ने टीवी रियल्टी शो में भी काम किया।
8. मोहर सिंह :-
मोहर सिंह को दतिया जिले में अपहरण के लिए 2006 में पांच साल के लिए जेल भेजा गया था जहां से वह 2012 में रिहा हुआ। जेल से छूटते ही मोहर सिंह ने अपनी पत्नी और बेटी की हत्या कर लाश को सिंध नदी में फेंक दिया था। 16 साल तक बीहड़ में रहे डाकू मोहर सिंह पर 550 मुकदमे थे जिनमें 400 हत्याओं का आरोप था। जेल में 8 साल सजा काट चुके पूर्व दस्यु मोहर सिंह फिलहाल सामाजिक कार्यों से जुड़ा हुआ है।
9. निर्भय गुज्जर :-
एक समय 40 गावों में निर्भय सिंह गुज्जर ने अपनी धाक जमा रखी थी। सरकार ने उसके ऊपर 2.5 लाख रुपये का इनाम भी रखा था। 2005 में मुठभेड़ में उसे मार दिया गया। निर्भस खूबसूरत महिला दस्युओं के कारण भी मशहूर था। इनमें सीमा परिहार, मुन्नी पांडे, पार्वती ऊर्फ चमको प्रमुख थीं।
10. पुतली बाई :-
चंबल में पुतली बाई का नाम पहली महिला डकैत के रूप में दर्ज है। खूबसूरत पुतलीबाई पर सुल्ताना डकैत की नजर पड़ी। पुतलीबाई अपना घर-बार छोड़कर सुल्ताना के साथ बीहड़ों में रहने लगी। सुल्ताना के मारे जाने के बाद पुतलीबाई गिरोह की सरदार बनी। 1950 से 1956 तक बीहड़ों में उसका जबरदस्त आतंक रहा। पुतलीबाई 23 जनवरी 1956 को शिवपुरी के जंगलो में पुलिस मुठभेड़ में मारी गई।
inextlive from Spark-Bites Desk



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