एमबीए में सीट बढ़ाने को ग्रीन सिग्नल

2019-06-17T09:26:07Z

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में एमबीए में सीट बढ़ाने के लिए ग्रीन सिग्नल दे दिया गया है। हांलाकि ये परमिशन फिलहाल ईडब्ल्यूएस के लिए मिली है अब भी बीएड और लॉ में पेंच अटका हुआ है।

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GORAKHPUR: गोरखपुर यूनिवर्सिटी में अब पहले से ज्यादा कैंडिडेट्स को मैनेजमेंट फील्ड में दम दिखाने का मौका मिलेगा. एकेटीयू से अप्रूवल के बाद गोरखपुर यूनिवर्सिटी में भी एमबीए की सीट 10 परसेंट बढ़ा दी गई है. इसे एडमिशन कमेटी की हरी झंडी मिल गई है. अब यूनिवर्सिटी में एमबीए की सीट्स 60 के बजाए 75 हो गई हैं. सीट बढ़ाकर यूनिवर्सिटी ने एकेटीयू को अवगत भी करा दिया है. अब अगर एकेटीयू के जरिए यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए बच्चे आते हैं तो ठीक, वरना यूनिवर्सिटी इन सीट्स को अपने लेवल से भरने के लिए प्रॉसेस शुरू करेगी. यह नई व्यवस्था इसी सेशन से लागू हो जाएगी.

25 परसेंट सीट बढ़ी

गोरखपुर यूनिवर्सिटी की एडमिशन कमेटी के फैसले पर नजर डालें तो इकोनॉमिकली वीकर स्टूडेंट्स के लिए सीट बढ़ा दी गई है. इसमें यूनिवर्सिटी के साथ ही एडेड कॉलेजेज में 25 परसेंट सीट में इजाफा किया गया है, जबकि सेल्फ फाइनेंस कॉलेजेज में 10 फीसदी सीट्स बढ़ाकर इकोनॉमिकली वीक स्टूडेंट्स का एडमिशन लिया जाएगा. इस संबंध में यूनिवर्सिटी ने 10 मई को ऑफिशियल नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. प्रवेश समिति की बैठक 28 मार्च को हुई थी.

बीएड और लॉ में अभी इंतजार

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में चलने वाला बीएड और एमएड कोर्स एनसीटीई से एफिलिएटेड है, जबकि बार काउंसिल ऑफ इंडिया की परमिशन से लॉ और इंटीग्रेटेड लॉ का कोर्स चलता है. दोनों ही बॉडी इन फैकेल्टी में सीट्स की संख्या तय करती हैं. शासन ने इस संबंध में निर्देश तो जारी कर दिए हैं, जिसका लेटर यूनिवर्सिटी को मिल चुका है, लेकिन दोनों विभागों को एफिलिएटिंग बॉडी से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है. इसकी वजह से यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन संबंधित बॉडी को लेटर लिखा है, लेकिन इसका जवाब अब तक उन्हें नहीं मिला है. अगर एडमिशन से पहले उनकी सहमति मिल जाती है, तो यूनिवर्सिटी सीट बढ़ाकर एडमिशन लेगी, अगर परमिशन नहीं मिलती है, तो इस बार ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के स्टूडेंट्स को इंतजार करना पड़ेगा.

 

एमबीए के लिए एकेटीयू को लेटर लिखा गया था, जहां से परमिशन मिलने के बाद सीट बढ़ा दी गई है. उन्हें अवगत भी करा दिया गया है. वह काउंसिलिंग के थ्रू अगर बच्चे भेजते हैं, तो उनका एडमिशन लिया जाएगा. इसके बाद अगर सीट खाली रह जाती हैं, तो यूनिवर्सिटी अपने लेवल से इन्हें फिल करेगी.

- डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह, ऑफिशिएटिंग रजिस्ट्रार, गोरखपुर यूनिवर्सिटी


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