ऑटोमेटिक ट्यूबवेल्स पर काम कर रहे 300 कर्मचारी

2018-10-20T06:00:18Z

छह माह पहले स्केड़ा सिस्टम से निगम की ट्यूबवेल हुई ऑटोमेटिक

137 के करीब ट्यूबवेल को करीब छह माह पहले स्केडा सिस्टम के तहत किया गया था ऑटोमेटिक

Meerut। नगर निगम के आला अधिकारियों की लापरवाही के चलते निगम के राजस्व को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। पहले कर्मचारियों के नाम पर फर्जीवाड़ा फिर सफाई की मशीनों की बेवजह खरीद और अब ऑटोमेटिक ट्यूबवेल पर ऑपरेटरों की ड्यूटी के नाम पर निगम के राजस्व को चूना लगाया जा रहा है। दरअसल, निगम के ट्यूबवेल को करीब छह माह पहले स्केडा सिस्टम के तहत ऑटोमेटिक किया जा चुका है। बावजूद इसके ऑटोमेटिक ट्यूबवेल पर ऑपरेटरों की ड्यूटी लगाई हुई है। जिसके कारण निगम को कर्मचारियों को बिना काम के ही वेतन देना पड़ रहा है।

पौने दो करोड़ का प्रोजेक्ट

निगम द्वारा शहर में रहने वाले लोगों को समय से पानी उपलब्ध कराने और कर्मचारियों वेतन जैसे अतिरिक्त खर्च को कम करने के उद्देश्य से गत वर्ष ट्यूबवेलों को ऑटोमेटिक करने की योजना लाई गई थी। जिसके तहत करीब 1.75 करोड़ रूपये की लागत से शहर के 137 के करीब ट्यूबवेल को करीब छह माह पहले स्केडा सिस्टम के तहत ऑटोमेटिक किया गया। हालांकि सिस्टम ऑटोमेटिक होने के छह माह बाद भी निगम की ट्यूबवेल पर निगम के करीब 300 स्थाई और संविदा कर्मचारी ड्यूटी कर रहे हैं।

करीब 50 लाख का बोझ

निगम के दायरे में करीब 157 ट्यूबवेल को संचालित किया जा रहा है। जिसमें से 137 ऑटोमेटिक हो चुकी हैं जबकि 20 ट्यूबवेल अभी बाकी हैं। इनमें से प्रत्येक ट्यूबवेल पर दो-दो कर्मचारियों की ड्यूटी लगी हुई है। जिनका वेतन 15 से 30 हजार रूपये तक है। ऐसे में निगम के राजस्व पर करीब 300 कर्मचारियों के अतिरिक्त वेतन का करीब 50 से 55 लाख रूपये प्रतिमाह का बोझ पड़ रहा है।

इस मामले में बोर्ड बैठक के लिए कुछ पार्षदों द्वारा प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार जांच कराकर कर्मचारियों की ड्यूटी में बदलाव किया जाएगा।

अली हसन कर्नी, अपर नगरायुक्त


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