डुबकी लगाई मांगा आशीष ली विदा

2016-02-23T02:10:47Z

- माघ के अंतिम स्नान पर्व माघी पूर्णिमा पर 45 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी

- प्रशासन ने सकुशल स्नान संपन्न होने पर ली राहत की सांस, सहयोगियों का जताया आभार

ALLAHABAD: तीर्थराज प्रयाग में स्थित गंगा, जमुना व अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में माघ मास के अंतिम स्नान पर्व पर पुण्य की डुबकी लगाने आस्थावानों का रेला उमड़ पड़ा। माघी पूर्णिमा पर कल्पवासियों सहित 45 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान का पुण्य फल प्राप्त किया। डुबकी लगाने का सिलसिला भोर से ही शुरू हुआ जो देरशाम तक जारी रहा।

इसके साथ ही संगम की रेती पर एक माह से चल रहा कल्पवास भी सम्पन्न हुआ। प्रशासन ने बताया कि पूरे माघ मास में सभी प्रमुख स्नान पर्व पर करीब 2 करोड़ 93 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। माघ मेला के दौरान आम दिनों में भी प्रतिदिन लगभग तीन लाख श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।

संतों ने भी लगाई डुबकी

माघी पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं के साथ संत महात्माओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगदगुरु घनश्यामाचार्य, जगद्गुरु चन्द्रभूषण, महामंडलेश्वर माधवदास, महामंडलेश्वर संतोषदास सतुआ बाबा, महामंडलेश्वर रामसुभग दास बिनैका बाबा, महामंडलेश्वर कपिलदेव दास नागा, स्वामी आनंद गिरी, महंत बृजभूषण दास, स्वामी गोपाल जी सच्चा बाबा आश्रम, स्वामी हरिचैतन्य ब्रम्हचारी आदि ने गंगा स्नान किया।

घाटों पर रही सुरक्षा

माघ के अंतिम स्नान पर भीड़ को देखते हुए संगम के घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। डीएम संजय कुमार व एसएसपी केएल इमैनुएल घाटों का निरीक्षण करते रहे। मेला क्षेत्र में आरएएफ, डोम माउण्टेन, सर्विलांस व्हीकल के साथ निगरानी की जाती रही। डीएम ने मेला सकुशल संपन्न कराने के लिए सभी सुरक्षाबलों का आभार जताया।

क्रियायोग शिविर का समापन

माघ मेला क्षेत्र में त्रिवेणी मार्ग पर लगे क्रियायोग आश्रम के शिविर में एक माह से चल रहा विशेष क्रियायोग प्रशिक्षण शिविर भी सोमवार को माघी पूर्णिमा के साथ समाप्त हो गया। इस अवसर पर क्रियायोग अनुसंधान संस्थान के स्वामी योगी सत्यम और महासचिव ज्ञानमाता डॉ। राधा सत्यम ने साधकों को क्रियायोग की विधियों की जानकारी दी।

मां गंगा की हुई आरती

माघी पूर्णिमा स्नान के बाद हरियाणा के चरखी दादरी आश्रम के उत्तराधिकारी आचार्य नीरज स्वरूप के नेतृत्व में बड़ी संख्या में संत महात्माओं व कल्पवासियों ने विधि विधान से मां गंगा की आरती उतारी। कई बड़े संत आरती में शामिल हुए। त्रिवेणी आरती संस्था की ओर से भी सकुशल मेला सम्पन्न होने के अवसर पर मां गंगा का पूजन व महाआरती की गई।


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