गर्मी में हीट स्ट्रोक से बचने के 5 आसान तरीके

2019-05-02T10:54:13Z

गर्मी में हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में अगर आप भी धूप में निकलते हैं तो आएइ जानें बीमारी से बचने के लिए क्या उपाय कर सकते हैं।

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LUCKNOW: राजधानी में पिछले कई दिनों से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक चल रहा है. ऐसे में हीट स्ट्रोक ने बच्चों, बड़ों सभी को परेशान कर रखा है. स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए चेतावनी भी जारी की है. साथ ही बहुत जरूरी काम होने पर ही घर से निकलने की सलाह दी है. बच्चों से लेकर बड़ों को सतर्क रहने की आवश्यक्ता है क्योंकि हीट स्ट्रोक या लू लगने से जान भी जा सकती है.

 

ब्रेन को नुकसान पहुंचने का खतरा
निदेशक संचारी रोग डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी के अनुसार उच्च तापमान से शरीर के आंतरिक अंगों को विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है. शरीर में उच्च तापमान उच्च रक्तचाप उत्पन्न करता है. मनुष्य के हृदय के कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न होता है, जो लोग एक या 2 घंटे से अधिक समय तक 40 डिग्री सेल्सियस तापमान अथवा गर्म हवा में रहते हैं. उनके मस्तिष्क में क्षति होने की संभावना प्रबल हो जाती है.

धूप में निकलने से करें परहेज
डॉक्टर्स के अनुसार हीट स्ट्रोक से बचने के लिए धूप में निकलने से बचें. अगर धूप में निकलना जरूरी है तो निकलते समय छाता लगा लें, टोपी पहन लें और ऐसे कपड़े पहनें, जिससे शरीर अधिक से अधिक ढका रहे. घर से बाहर निकलने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर निकलें. दिन में कई बार पानी पिएं. डिहाइड्रेशन से बचने के लिए बहुत जरूरी है कि पर्याप्त मात्रा में पानी, मौसमी फलों का रस, गन्ने का रस, कच्चे आम का रस, ओआरएस घोल, नारियल पानी का उपयोग करें. चाय कॉफी और कोल्ड ड्रिंक पीने से परहेज करें.

हीट स्ट्रोक का इलाज
शरीर के तापमान को नियंत्रित करने का प्रयास करें. मरीज को ठंडे स्थान पर रखें. मरीज को ठंडी हवा करें, उसके शरीर को स्पंज अथवा गीले कपड़े से पोछें. मरीज को ठंडे पानी के टब में रखें अथवा उसके ऊपर बर्फ की पट्टी रखें. जब तक उसका तापमान 100 डिग्री फारेनहाइट तक ना हो जाए. पानी की कमी होने की स्थिति में आईवी फ्लूइड दें. गंभीर रोगियों को अस्पताल में भेजकर इलाज कराएं.

तो डॉक्टर से करें संपर्क
डॉक्टर्स के अनुसार गर्म लाल सूखी स्किन का होना, पसीना ना आना, तेज पल्स होना, सांस तेज होना, व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिर दर्द, मितली, थकान, कमजोरी होना, पेशाब न आना या कम होना.

इनसे बचें
बासी भोजन या खुले में बिकने वाला गन्ने का रस, अन्य फलों का रस, कटे फल, खुली तली भुनी खाद्य वस्तुओं और प्लास्टिक पाउच में बिकने वाले पेयजल, खाद्य पदाथरें से परहेज करें.

क्या करें ?

- पानी ज्यादा पिए, ताकि शरीर में पानी की कमी से होने वाली बीमारी से बचा जा सके

- हल्के ढीले ढाले सूती वस्त्र पहने ताकि शरीर तक पहुंचे और पसीने को सोखकर शरीर को ठंडा रखे .

-धूप में बाहर जाने से बचे, अगर बहुत जरूरी हो तो धूप के चश्मे एटोपी एवं जूता चप्पल पहनकर ही घर से निकले.

-यात्रा करते समय अपने साथ बोतल में पानी जरूर रखें.

-घरेलू पेय जैसे नींबू पानीए कच्चे आम का पन्ना का प्रयोग करें जिससे शरीर में पानी की कमी ना हो.

- कोई दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

-एनिमल्स को भी गर्मी और धूप से बचाएं

इनका रखें ध्यान

- धूप में खड़े वाहनों में बच्चों व पालतू जानवरों को न छोड़ें . दिन के 11.00 से 3.00 के बीच बाहर ना निकले .

- गहरे रंग के भारी एवं तंग वस्त्र पहनने से बचें

- खाना बनाते समय कमरे के दरवाजे खुले रखें जिससे हवा का आना-जाना बना रहे. नशीले पदार्थ शराब और अल्कोहल के सेवन से बचें.

-उच्च प्रोटीन युक्त पदार्थो का सेवन करने से बचें. बासी भोजन न करें.

Posted By: Kushal Mishra

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