साहब जो थे दागदार वे ही बन रहे थानेदार

2019-02-23T06:00:03Z

जिले में पांच इंस्पेक्टर के कार्य क्षेत्र में फेरबदल

आरोपों में हटाकर फिर सौंप दी गई जिम्मेदारी

द्दह्रक्त्रन्य॥क्कक्त्र: जिले के पुलिस महकमे में चुनाव आयोग की गाइडलाइन को देखते हुए ट्रांसफर-पोस्टिंग की उठापठक जारी है। गुरुवार को एसएसपी ने पांच इंस्पेक्टर के कार्य क्षेत्र में फेरबदल का निर्देश जारी किया। कुछ नए तो कुछ पुराने चेहरों को एक बार फिर से थानों की जिम्मेदारी सौंप दी। लेकिन इस बदलाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विभिन्न तरह के आरोपों में घिरने पर जिनसे पदभार छीन लिया गया था, चंद दिनों के भीतर उनकी पोस्टिंग को लेकर महकमे में दिनभर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। आईजी ने कहा कि जिले में इंस्पेक्टर-दरोगा को चार्ज देना एसएसपी का काम है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति आरोपों में घिरा है तो उसे नई जिम्मेदारी से बचना चाहिए। किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ है इसकी समीक्षा की जाएगी।

सीओ सहित पांच का बदला कार्यक्षेत्र

दो दिन पूर्व एसएसपी डॉॅ। सुनील गुप्ता ने एक सीओ और पांच इंस्पेक्टर के कार्यक्षेत्र में फेरबदल किया था। सीओ सुमित शुक्ला को उन्होंने सीओ चौरीचौरा सर्किल का प्रभार दिया। जबकि, इंस्पेक्टर मनोज राय को गुलरिहा, राणा देवेंद्र प्रताप सिंह को कैंपियरगंज, इंस्पेक्टर अर्चना सिंह को महिला थाना, दुर्गेश सिंह को सिकरीगंज थाना पर भेजा गया। सिकरीगंज के प्रभारी रहे देवेंद्र सिंह को पीआरओ बनाया। जिले में ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर काफी चर्चाएं शुरू हो गई। महकमे के लोगों का कहना है कि जल्दबाजी में हुए तबादलों में उन लोगों को जिम्मेदारी मिली है, जिनको पब्लिक की शिकायत पर हटाया दिया गया था। शुक्रवार को दिनभर पुलिस कर्मचारी इस बात की चर्चा करते रहे कि आईजी की रिपोर्ट पर हटाए गए इंस्पेक्टर भी चार्ज पा गए। इसको लेकर लोग तरह-तरह के कयास लगाते रहे।

आईजी की रिपोर्ट पर हटे, फिर मिला चार्ज

चार्ज पाने वाले इंस्पेक्टर मनोज राय और राणा देवेंद्र सिंह को खूब चर्चा रही। दोनों इंस्पेक्टर को आईजी की रिपोर्ट पर थाने से हटाया गया था। खजनी में हुए ट्रिपल मर्डर में मनोज राय लाइन हाजिर हो गए थे। जबकि, चौरीचौरा में पुलिस टीम पर बदमाशों के हमला करने के बाद से तत्कालीन एसएचओ राणा देवेंद्र सिंह अफसरों के निशाने पर थे। पुलिस विभाग की छिछालेदर होने पर आईजी ने मामले की जांच का निर्देश दिया था। जांच में लापरवाही सामने आने पर एसएसपी ने राणा देवेंद्र सिंह को हटा दिया था। कई अन्य लोगों के कार्य क्षेत्र भी बदले गए थे जो साइड लाइन चल रहे हैं।

केस एक

ट्रिपल मर्डर में लापरवाही पर हटे थे एसएचओ

20 दिसंबर 2018: खजनी के पुरसापार में दो पक्षों के विवाद में तीन लोगों की हत्या हो गई थी। भूमि-मकान को लेकर चल रहे विवाद की शिकायत पहले हो चुकी थी। तीन लोगों के मर्डर के बाद हरकत में आए अधिकारियों ने आनन-फानन में कार्रवाई की। राजस्व कर्मचारियों के अलावा हलका दरोगा, सिपाही पर पहले कार्रवाई हुई। बाद में एसएसपी ने खजनी एसएचओ मनोज राय को लाइन हाजिर कर दिया। इसके बाद वहां पर इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार शुक्ला की तैनाती की गई।

केस दो

पुलिस पर हमले में इंस्पेक्टर ने कराई थी फजीहत

14 अक्टूबर 2017

रात चौरीचौरा में शातिर बदमाश मिथुन और उसके साथियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया था। हमले के दौरान प्रभारी इंस्पेक्टर राणा देवेंद्र सिंह पर पुलिस टीम को छोड़कर भागने का आरोप लगा था। तब अधिकारियों ने बताया कि इंस्पेक्टर की लापरवाही से कई लोगों की जान आफत में पड़ गई थी। इस आरोप में 23 अक्टूबर 2018 को एसएसपी शलभ माथुर ने राणा देवेंद्र सिंह को साइड लाइन कर दिया। दो दिन पूर्व उनको कैंपियरगंज थाना का प्रभार मिलने को खूब चर्चा हो रही है।

केस तीन

सनसनीखेज मर्डर में गंवानी पड़ी थानेदारी

18 दिसंबर 2018: पिपराइच एरिया में मिश्रौलिया में प्रधान और उनके पक्ष के लोगों से मारपीट होने पर बुजुर्ग शिव प्रसाद की मौत हो गई थी। पब्लिक के विरोध करने पर एसएसपी ने सख्त एक्शन लिया। उन्होंने इंस्पेक्टर सारनाथ सिंह को हटाकर सुधीर सिंह की पोस्टिंग कर दी। पिछले साल अक्टूबर में खोराबार, कैथवलिया निवासी पूर्व प्रधान के बेटे अनिकेत की सैलून में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दिनदहाड़े हई हत्या से जिले में सनसनी फैल गई थी। इस मामले में प्रधान सहित कई लोगों को नामजद किया गया। बाद में पता लगा कि मुख्य अभियुक्त को जिला बदर करने की नोटिस जारी की गई थी जिसका तामिला एसएचओ ने नहीं कराया। तब इस लापरवाही के आरोप में तत्कालीन एसएसपी शलभ माथुर ने खोराबार की थानेदारी छीनकर सुधीर सिंह को पुलिस लाइंस भेज दिया था।

गड़बडि़यों पर भारी पड़ता जुगाड़

यह मामले हैं कि कानून-व्यवस्था में गड़बड़ी, पब्लिक की शिकायत और अधिकारियों की रिपोर्ट पर हटाए गए दरोगा-इंस्पेक्टर को आसानी से दोबारा तैनाती मिल जाती है। इससे जिले में पब्लिक का भरोसा टूटने लगा है। पारदर्शिता और मानक की बात करने वाले अफसर भी ऐसे मामलों में चुप्पी साध जाते हैं। किसी तरह की बात सामने आने पर पुलिस अधिकारी कहते हैं जो इंस्पेक्टर, दरोगा और सिपाही मौजूद हैं। उन्हीं लोगों के बीच से ही फेरबदल किया जाएगा। फिर कोई शिकायत मिलने पर जांच पड़ताल कर कार्रवाई की जाती है। कई बार जांच में आरोपों की पुष्टि न होने पर फाइल क्लोज कर दी जाती है।

वर्जन

गोरखपुर जिले में इंस्पेक्टर की तैनाती की गई है। जिले में ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार एसएसपी को है। इस बात की समीक्षा की जाएगी कि ऐसे कितने लोग हैं जिनको पूर्व में किसी आरोप में हटाया गया था। यह भी हो सकता है कि मैन पॉवर की कमी से पोस्टिंग करनी पड़ी हो। किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ है। इसकी पड़ताल की जाएगी।

जय नारायण सिंह, आईजी गोरखपुर रेंज


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