रेल में खेल कर एक महीने के अंदर 6 अरब रुपए ब्लैक से हो गए व्हाइट

2019-02-10T06:00:56Z

आरटीआई में हुआ खुलासा: नोटबंदी के पहले महीने में ही हर दिन हो रहे थे 2 लाख टिकट कैंसिल

manish.mishra@inext.co.in

PATNA : मोदी सरकार के 5 साल पूरे होने वाले हैं। इस 5 साल में सबसे बड़ा फैसला था नोटबंदी। 8 नवंबर 2016 को अचानक से 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए गए। दावा किया गया कि नोटबंदी से मार्केट में व्याप्त ब्लैक मनी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। भारत की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। सरकार के इस दावे ने लोगों में हौंसला भर दिया। लोग लंबी लाइनों में लगकर बैंक से अपने नोट बदलवाने लगे। उसी दौरान एक लंबी लाइन और लग रही थी, जहां ब्लैक मनी को व्हाइट किया जा रहा था। यह लाइन थी रेलवे स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर की। चूंकि उस दौरान पीएम मोदी की घोषणा में इस बात की छूट दी गई थी कि जो भी रेलवे टिकट कराएगा, अगर वह कैंसिल करवाता है तो उसे पैसा नकद न देकर खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। इसी का फायदा उठाकर ब्लैक मनी (कैश) से पहले टिकट करवाए गए और फिर कैंसिल करवाने पर रेलवे ने खाते में व्हाइट मनी जमा कर दी। इस बात का खुलासा नोटबंदी के दो साल बाद सूचना के अधिकार में मिली आधी अधूरी जानकारी में हुआ है। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के पास उपलब्ध आरटीआई के दस्तावेजों में यह बात सामने आई है कि 9 नवंबर 2016 से 9 दिसंबर 2016 यानी नोटंबदी के महीने में लगभग 6 अरब रुपए के टिकट कैंसिल करवाए गए, जिन्हें रेलवे ने अकाउंट में जमा करवाया है।

10 गुना बढ़ गया कैंसिलेशन

आरटीआई के दस्तावेजों का जब अध्ययन किया गया तो खुलासा हुआ कि नोटबंदी के एक महीने यानी 9 नवंबर 2016 से 9 दिसंबर 2016 के बीच 2 करोड़ 83 लाख 75 हजार 23 टिकट बुक किए गए। जो अपने आप एक रिकॉर्ड है। इस टिकट बुकिंग से रेलवे के पास 29 अरब 74 करोड़ 20 लाख 4 हजार 475 रुपए जमा हुए। जब टिकट कैंसिल करने वालों का कैलकुलेशन किया गया तो वह भी चौंकाने वाला था। इन 30 दिनों में 60 लाख 20 हजार 694 टिकट कैंसिल हुए। जिसके एवज में 5 अरब 98 करोड़ 52 लाख 14 हजार 760 रुपए रेलवे ने लोगों के खाते में जमा किया। जबकि आम दिनों में महज 6 लाख 80 हजार टिकट ही हर महीने कैंसिल होते हैं। स्पष्ट है कि नोटबंदी के महीने में टिकट कैंसिलेशन 10 गुना बढ़ गया था।

हर दिन 1 अरब के टिकट

नोटबंदी महीने में एक-एक दिन की टिकट बुकिंग का रिकॉर्ड निकाला गया तो वह भी चौंकाने वाला था। 30 दिन में 17 दिन ऐसे थे जब हर दिन एक अरब से अधिक के टिकट बुक किए जा रहे थे। नोटबंदी की घोषणा के साथ जैसे ही यह कहा गया कि रेलवे में टिकट बुकिंग कैश में ली जाएगी वैसे ही काउंटर पर लंबी लाइन लग गई। नोटबंदी के अगले ही दिन 9 लाख 60 हजार 489 टिकट बुक हुए। जिसके एवज में रेलवे के पास 1 अरब 24 करोड़ 51 लाख 87 हजार 936 रुपए जमा हुए। इसके बाद दो दिन तक एक अरब रुपए से अधिक के टिकट बुक होते गए। नवंबर के 22 दिनों में 13 दिन ऐसे थे जब 9 से 10 लाख टिकट हर दिन बुक हो रहे थे और रेलवे काउंटर पर एक अरब से अधिक रुपया जमा किया जा रहा था। दिसंबर के पहले सप्ताह में 4 दिन ऐसे थे जब एक अरब से अधिक रुपया जमा हुआ।

आरटीआई में हुआ खुलासा

बिहार के आरटीआई एक्टिविस्ट अजीत कुमार सिंह ने रेल मंत्रालय से सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी कि नोटबंदी महीने में कितने रेल टिकट का रिजर्वेशन हुआ और कितने टिकट कैंसिल किए गए। टिकट कैंसिल होने पर कितना पैसा वापस हुआ। इसके अलावा कितने ऐसे यात्री थे जिन्होंने न तो टिकट कैंसिल करवाया और न यात्रा की। इन तीन बिंदुओं पर रेलवे ने एक महीने गुजरने के बाद भी जानकारी नहीं दी तो उन्होंने प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास आवेदन किया। चार महीने बाद आधी अधूरी जानकारी दी गई। जिसमें केवल एक महीने का रिकॉर्ड दिया गया कि जो टिकट बुक और कैंसिल हुए। अजीत कुमार रेल मंत्रालय के खिलाफ द्वितीय अपील भी की है।

8 दिसंबर को कैंसिल हुए सबसे ज्यादा टिकट

आरटीआई के कागजों को खंगाला गया तो यह सामने आया कि नोटबंदी के महीने में 13 दिन ऐसे थे, जब हर दिन 2 लाख से अधिक टिकट कैंसिल हो रहे थे। सबसे अधिक टिकट 8 दिसंबर को कैंसिल हुए। इस दिन 2 लाख 33 हजार 643 टिकट कैंसिल गए, जिसके एवज में रेलवे ने खातों में 24 करोड़ 10 लाख 50 हजार 2 रुपए वापस किए। इस एक महीने में 24 नवंबर ऐसा दिन था जब सबसे कम टिकट कैंसिल हुए। वो भी 1 लाख 48 हजार 230 टिकट थे।

20 करोड़ से अधिक रुपए कर रहा था वापस

नोटबंदी के महीने में 18 दिन ऐसे थे जब रेलवे हर दिन 20 करोड़ से अधिक रुपए खाते में वापस कर रहा था। नोटबंदी के अगले ही दिन 9 नवंबर को 24 करोड़ 34 लाख 78 हजार 827 रुपए वापस किए गए। सबसे अधिक रुपए 5 दिसंबर को वापस हुए। 25 करोड़ 82 लाख 50 हजार 685 रुपए रेलवे ने खातों में टिकट कैंसिल होने पर वापस भेजे। सबसे कम रुपए 20 दिसंबर को वापस किए गए। यह भी 15 करोड़ 37 लाख 98 हजार 480 रुपए थे।

दिमाग से हो गई ब्लैक मनी व्हाइट

8 नवंबर 2016 को जब देश में नोटबंदी लागू हुई तो पुराने नोट को खपाने की होड़ लग गई। बैंक के एटीएम से लेकर पेट्रोल पम्प तक लंबी कतारे लग गई थी। इस बीच काले धन को सफेद करने का भी बड़े पैमाने पर खेल चला। पेट्रोल पम्प से लेकर रेल रिजर्वेशन काउंटर तक ब्लैक मनी को व्हाइट किया गया। नोटबंदी होते ही नोट सार्टेज होने के कारण रेलवे काउंटर से रिजर्वेशन कैंसिल कराने वालों के लिए वापसी का पैसा उनके बैंक अकाउंट में डालने की व्यवस्था बनाई गई थी और यही ब्लैक मनी को व्हाइट बनाने में काम आया।


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.