पति-पत्नी का रिश्‍ता विश्‍वास से जुड़ा होता है। दोनों को एक-दूसरे का पूरक कहा जाता है। भारतीय संस्‍कृति में नारी को सम्‍मान दिया जाता है। समय के बदलाव के साथ समाज में चल रही उथल-पुथल ने नारी को एक सीमित दायरे में ला कर खड़ा कर दिया है। उसके अधिकारों पर ढेरों पाबन्दिया लगा दी गई हैं। पति पत्‍नी का प्‍यार और एक दूसरे पर उनका भरोसा ही दोनों के रिश्‍तों को मजबूत बनाता है। ऐसा ही एक नज़ारा इंदौर में एक सामुहिक विवाह सम्मेलन के दौरान देखने को मिला जहां पति ने अपनी दिव्‍यांग पत्‍नी को गोद में उठा कर लोगों के लिए मिसाल कायम की है।


पति पत्नी दोनो हैं दिव्यांगइंदौर में एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में एक अनोखा नजारा देखने को मिला जब शादी की रस्मों के दौरान दो दिव्यांगों ने एक दूसरे के प्रेम में पूरी तरह डूबे नजर आए। इस समारोह की सबसे चर्चित जोड़ी रायसिंह और श्यामा की रही। गंगा दशमी के दिन एक सामाजिक संगठन द्वारा आयोजित विवाह सम्मेलन में 60 जोड़ों ने विवाह के बंधन में बंध साथ जीने मरने की कसमें खाई। पवित्र अग्नी को साक्षी मान कर उन्होंने सात फेरे लेकर सात जन्मो तक एक दूसरे का साथ निभाने का वादा किया। समारोह का आयोजन रीजनल पार्क में किया गया था।

खुशी में नम हुई हर आंख
यह देख एक और दुल्हे ने भी अपनी दुल्हन को गोद में उठा लिया। जोड़े को देखकर समारोह में शामिल सभी की आंखे खुशी से नम हो गईं। कुछ खिलखिलाकर हंस पड़े तो कुछ ने ताली बजाना शुरु कर दिया। इस समारोह में एक और दिव्यांग जोड़ा भी शादी के पवित्र बंधन में बंधा। समाज में जहां पति पत्नी आज के दौर में छोटी-छोटी बातों पर अपने वैवाहिक रिश्तों को खत्म कर डालते हैं वहां इस तरह के उदाहरण बहुत कम देखने को मिलते है। पति-पत्नी एक-दूसरे का सम्मान करके ही इस रिश्ते की मर्यादा को बनाए रख सकते हैं।

Posted By: Prabha Punj Mishra