Countdown 2011 Indian Tennis में बनी मिलने बिछड़ने की दास्‍तान

2011-12-17T19:00:23Z

Leander Paes and Mahesh Bhupathi reunited after nine years only to split up within months as Indian tennis' highs and lows remained centered on its doubles players in the year 2011

लिएंडर पेस और महेश भूपति नौ साल बाद मिले और फिर अलग हो गए. भारतीय टेनिस खिलाडिय़ों ने 2011 में कई उतार चढाव देखे.  लंदन ओलंपिक 2012 में पदक जीतने की कवायद में पेस और भूपति ने इस सत्र में मिलकर खेलने का फैसला किया था लेकिन कुछ महीने में ही दोनों अलग हो गए. इसके अलावा भारत पाक जोड़ी रोहन बोपन्ना और ऐसाम उल हक कुरैशी भी अलग हो गए.
 भूपति आगामी सत्र में बोपन्ना के साथ खेलेंगे. दूसरी ओर पेस सर्बिया के यांको टिपसारेविच को चेन्नई ओपन में जोड़ीदार बनाएंगे. इसके बाद वह राडेक स्टीपानेक के साथ टूर पर खेलेंगे.  बोपन्ना का कुरैशी से अलग होने का फैसला चौंकाने वाला रहा. कुरैशी ने इसके बारे में कहा था ,‘‘ मैं चाहता था कि रोहन के साथ खेलूं लेकिन अलग होने का फैसला उसका है. मैं इससे हैरान हूं.’’ दूसरी ओर पेस का मानना था कि टूर पर उनके और भूपति के साथ युवा जोड़ीदार होने चाहिए.

 पेस और भूपति ने एक होने के बाद जनवरी में चेन्नई ओपन जीता था. दोनों आस्ट्रेलियाई ओपन के फाइनल में पहुंचे जहां उन्हें अमेरिका के बाब और माइक ब्रायन ने हराया. इस जोड़ी ने अप्रैल में सोनी एरिक्सन ओपन जीता और एटीपी विश्व टूर युगल टीम रैंकिंग में नंबर वन पर पहुंच गए. सिनसिनाटी में वेस्टर्न एंड सदर्न ओपन फाइनल जीतकर उन्होंने 10 साल में एटीपी टूर मास्टर्स 1000 टूर्नामेंट में पहला खिताब हासिल किया.
 इस बीच चोटों से परेशान सानिया ने साल की शुरूआत घुटने की चोट के साथ की. चोट के बावजूद सानिया ने तीन डब्ल्यूटीए युगल खिताब जीते. दो में रूस की एलेना वेसनीना उनकी जोड़ीदार थी तो एक में कजाखस्तान की यारोस्लावा श्वेदोवा.  वह फ्रेंच ओपन युगल वर्ग के फाइनल में पहुंची लेकिन खिताब नहीं जीत सकी. उनकी और वेसनीना की जोड़ी को आंद्रिया हलावाकोवा और लूसी राडेका ने हराया.
 विम्बलडन में सानिया और वेसनीना को सेमीफाइनल में क्वेटा पेश्के और कैटरीना सेबोत्निक ने हराया। एकल में वह 166 से 87वें स्थान पर पहुंची.
 चार्लस्टन में वह डब्ल्यूटीए टूर्नामेट के क्वार्टर फाइनल में पहुंची जो सत्र में उसका एकल वर्ग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था.  पुरूष एकल में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त सोमदेव देववर्मन सर्वश्रेष्ठ एकल रैंकिंग हासिल करके 62वें स्थान पर पहुंचे. सत्र के आखिर में वह 84वें स्थान पर रहे. उसने इस साल रोजर फेडरर और रफेल नडाल से खेला हालांकि अच्छे प्रदर्शन के बावजूद हार गए.
 सर्बिया के खिलाफ डेविस कप विश्व ग्रुप में अच्छे प्रदर्शन के बाद उसने बीएनपी परीबस ओपन के चौथे दौर में प्रवेश किया.  सोनी एरिक्सन मियामी मास्टर्स में वह तीसरे दौर तक पहुंचा। अमेरिकी ओपन में हालांकि गुलिरेमो गार्सिया लोपेज ने उसे दूसरे दौर में हराया.
 अगले साल फोकस ओलंपिक पर रहेगा जिसमें भूपति और बोपन्ना भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. पेस यदि युगल रैंकिंग में अगले साल जून तक शीर्ष दस में पहुंचते हैं तो वह भी देश के शीर्ष एकल खिलाड़ी सोमदेव के साथ खेल सकते हैं.


Posted By: Inextlive

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