चमकी बुखार से बिहार में अब तक 80 माैतें खाली पेट न खाएं लीची जानें लक्षण व बचने के तरीके

2019-06-16T16:28:13Z

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम का कहर बरपा है। इसकी वजह से अब तक यहां 80 बच्चों की मौत हो गई। आज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन यहां दाैरा करने पहुंचे हैं। जानें इस बीमारी से के लक्षण व बचने के तरीके

पटना (एजेंसियां)। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) की वजह से अब तक करीब 80 बच्चों की मौत हो गई है। रिपोर्ट्स बिहार में स्थानीय तौर पर इसको चमकी बुखार कहा जा रहा है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है रविवार को भी सात बच्चों की मौत हो गई। वहीं शनिवार रात तक करीब 73 बच्चों की मौत हो चुकी थी। हालांकि, बीमारी के कारण अनौपचारिक मौतों की संख्या 100 से अधिक बताई जाती है क्योंकि कुछ बच्चों की मौत अस्पताल में भर्ती होने से पहले हो गई थी।

जिले में बिगड़ते हालात को लेकर चर्चा

वहीं बिहार में बिगड़ते हालातों को देखते हुए आज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन रविवार को मुजफ्फरपुर जिले का दाैरा करने पहुंचे। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के साथ  राज्य के स्वामित्व वाले श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) में भर्ती मरीजों का हालचाल पूछा। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रियों संग स्थिति का जायजा लेने के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मुजफ्फरपुर जिले में बिगड़ते हालात को लेकर चर्चा की।

मौतें गर्मी व उमस के कारण हो रहीं

एक जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि शहर में एसकेएमसीएच और निजी केजरीवाल अस्पताल में एईएस के लक्षणों के साथ नए मामले सामने आ रहे हैं।  न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक डॉक्टरों का दावा है कि एईएस के कारण होने वाली मौतें अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण हो रही हैं। शनिवार को झुलसा देने वाली गर्मी ने राज्य के विभिन्न जिलों के कम से कम 25 लोगों की जान ले ली। बिहार सीएम नीतीश कुमार ने एईएस से मरने वाले बच्चों के परिवारों को 4 लाख रुपये अाैर जिला प्रशासन और डॉक्टरों को इस पर काबू पाने का निर्देश दिया है।
 
जानें लक्षण और बचने के तरीके
वहीं बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने राज्य सरकार बच्चों को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है। दवाओं से लेकर डाॅक्टर आदि सब उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पटना के एम्स से भी डॉक्टरों और नर्सों को बुलाया गया है। पांच साल पहले की याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस बीमारी के कारण रात में खाली पेट सोना, डिहाइड्रेशन और खाली पेट लीची खाना आदि थे। ऐसे में बच्चों को इन चीजों से बचाने की कोशिश करें। इंसेफेलाइटिस वायरल बीमारी है। इसके तेज बुखार, ऐंठन और सिरदर्द जैसे लक्षण होते हैं और कुछ ही दिन में मरीज की जान पर बन आती है।

 


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