लड़कियों को नहीं लड़कों को समझाने का वक्त एडीजी

2019-02-13T06:00:52Z

- आरयू के ऑडिटोरियम में वीमेन ग्रीवांस सेल ने आयोजित की वर्कशॉप

-800 स्टूडेंट्स ने कराया रजिस्ट्रेशन, एक्सपर्ट ने दिए सुझाव

क्चन्क्त्रश्वढ्ढरुरुङ्घ :

आरयू के वीमेन ग्रीवांस सेल ने ट्यजडे को वर्कशॉप का आयोजन किया। इसका विषय जेंडर सेंसिटीलाइजेशन था। कार्यशाला में चीफ गेस्ट एडीजी प्रेम प्रकाश ने कई महत्वपूर्ण जानकारी दी। वहीं ग‌र्ल्स के सवालों का एक्सपर्ट ने जवाब दिया। विभिन्न कॉलेजों से 800 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया।

पुलिस-पब्लिक के बीच गैप कम हो

एडीजी ने बताया कि ग‌र्ल्स प्रॉब्लम में किन नम्बर्स का यूज हेल्प के लिए कर सकती हैं इसकी जानकारी देते हुए अवेयर किया। कहा कि आप लोगों को पुलिस से डरना नहीं है, पुलिस तो हेल्प के लिए बनी है। जनता और पुलिस के बीच जो गैप बना हुआ है, वह गैप इस तरह के प्रोग्राम से दूर होता है। लड़कों को समझाते हुए कहा कि अब सभी जगह बात होने लगी है, कि लड़कियों को नहीं बल्कि लड़कों को समझाने की जरूरत है। साथ ही यूपी कॉप की जानकारी देते हुए बताया कि सभी छात्राओं को अपने मोबाइल में यह ऐप डाउनलोड करना चाहिए।

काम बांटने से बढ़ी समस्या

आरयू वीसी प्रो। अनिल शुक्ल ने कहा कि नारी को अबला न समझो बिल्कुल। समाज में परिपटी चली आ रही है कि महिला ये काम करेगी और पुरुष ये काम करेगा। समस्या यहीं खड़ी हुई है, क्योंकि महिला और पुरुष दोनों ही कोई भी काम कर सकते हैं। सीजेएम अरविन्द शुक्ला ने छात्राओं को जरूरी एक्ट और उनका प्रयोग बताया।

जेंडर वाइज देखना करें बंद

वीमेन ग्रीवांस सेल की मेंबर डॉ। अनीता त्यागी ने कहा कि हम सुबह जागने के बाद पहले यह विचार कर लें कि पूरा दिन कैसे बिताना है तो इस तरह की घटनाएं ही बंद हो जाएंगी। हम लोगों की सबसे बड़ी कमी है कि जेंडर बाइज लोगों को देखते हैं।

यह रही छात्राओं की क्वेरी

क्वेरी- माता-पिता अच्छी बातों का विरोध करते हैं तो क्या मैं झगड़ा करूं?

एक्सपर्ट-जब आप छोटी-छोटी इच्छाओं को पूरा कराने के लिए माता-पिता से लड़ सकती हो, चाहे मनपंसद ड्रेस हो या कुछ और तो क्या एक अच्छे विचार और व्यवहार के लिए नहीं लड़ सकती।

क्वेरी- समाज करने नहीं देता।

एक्सपर्ट: समाज क्या है, समाज तो आप और हम हैं। समाज तो लगातार परिवर्तनशील है। समाज एक जैसा कब रहा है। आज से दस वर्ष पहले न था और न होगा। परिवर्तन इसीलिए आता है कि इसमें लगातार नए आचार-विचार और आचरण जुड़ते रहे। समाज की संरचना हमसे मिलकर बनी है। हम सुधरेंगे तो समाज सुधरेगा।


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