भ्रष्टाचार व उत्पीड़न के खिलाफ अब हड़ताल पर जूनियर डॉक्टर

2019-07-07T06:01:00Z

-ओपीडी से लेकर मुख्य इमरजेंसी तक सेवाएं ठप

PATNA: बिहार के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में जूनियर डॉक्टर एक बार फिर से हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल की वजह से अस्पताल में न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं बल्कि इमरजेंसी और ओपीडी सेवा भी पूरी तरह से ठप हो गया है। पिछले माह हुए हड़ताल से ये हड़ताल बिल्कुल अलग है। इस बार डॉक्टरों की हड़ताल मरीज से झगड़ा या मारपीट, सुरक्षा का नहीं है बल्कि अपने ही एचओडी के कथित उत्पीड़न और भ्रष्टाचार को लेकर है। पढि़ए हड़ताल का हाल

महज 300 की हो पाई जांच

सरकारी आंकड़ों की अगर बात करें तो 100 से 120 ऑपरेशन होने वाले अस्पताल में महज सत्र ऑपरेशन ही हुए है। राज्य भर से कुल 1280 मरीजों से रजिस्ट्रेशन कराया जिसमें

से सीनियर डॉक्टर लगभग 300

मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर

पाए। सबसे अधिक परेशानी प्रसूति विभाग में डिलिवरी के लिए आए मरीजों को हुई जहां इमरजेंसी में भर्ती से कर्मचारियों ने साफ तौर पर मना कर दिया।

मुख्य इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं

जूनियर डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने के बाद अस्पताल के मुख्य इमरजेंसी भी पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। इमरजेंसी के अंदर इलाज के लिए मरीज तड़प रहे थे। कंट्रोल रूम में इमरजेंसी के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ। अभिजीत सिंह के साथ अन्य चिकित्सक बैठक करने में व्यस्त थे।

मरीजों ने सुनाया दर्द

सीतामढ़ी से अपने पिता का इलाज कराने आए राम मनोहर ने बताया कि जिंदगी और मौत से पिता लड़ रहे हैं। यहां दर्द की दवाई लिखने के लिए भी कोई डॉक्टर मौजूद नहीं है। मुंगेर से आए मरीज के परिजन विनोद ने बताया कि कई बार गुहार लगाने पर एक मिनट के लिए डॉक्टर साहब आए थे और सब ठीक है कहकर चले गए। इधर मरीज की हालत बिगड़ती जा रही है।

हड़ताल की ये है कहानी

हड़ताल का सच जानने के जूनियर डॉक्टरों से बात की तो पता चला कि मामला ऑर्थोपेडिक्स यानी हड्डी विभाग के एचओडी विजय कुमार से जुड़ा है। जूनियर डॉक्टरों ने बताया कि डॉ। विजय कुमार जबरन एक विशेष कंपनी की दवा मरीजों को लिखने का दबाव बनाते हैं और जो डॉक्टर इस दवा को नहीं लिखता है उनपर कार्रवाई कर परीक्षा में फेल कर देते हैं।

कमीशन का हो रहा खेल

जूनियर डॉक्टरों की मानें तो हड्डी विभाग के किसी भी मरीज का पर्चा देख लीजिए, सभी पर आपको एक विशेष कंपनी की दवाई लिखी मिल जाएगी। इसे चेक करने के लिए डॉ। विजय कुमार खुद भी जाते हैं। ये दवाई मरीजों को बाहर एक निर्धारित दुकान में ही मिलती है। जिसके एवज में दवाई कंपनी की ओर से 15-20 लाख रुपए उन्हें प्रतिमाह कमीशन मिलता है। इसकी शिकायत के बाद पीएमसीएच के प्राचार्य ने जांच कमेटी का गठन कर 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है।

जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं मगर सीनियर डॉक्टरों ने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया है। 1280 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया। कुछ ऑपरेशन बाधित हुए हैं।

-डॉ राजीव रंजन, अधीक्षक पीएमसीएच


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