यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसा एक झपकी आई और 29 परिवार उजड़ गए ये हैं ड्राइवर्स की ड्यूटी के नियम

2019-07-09T10:05:13Z

यमुना एक्सप्रेस वे से यात्रियों को लेकर दिल्ली जा रही बस के ड्राइवर्स को झपकी आई और 29 परिवार उजड़ गए

2 हजार से अधिक रोडवेज की बसें

100 स्कैनिया और वाल्वो बसें

160 शताब्दी बसें

50 पिंक बसें

6 हजार से अधिक ड्राइवर

14 हजार से अधिक संविदा ड्राइवर

5 हजार से अधिक रेग्युलर कंडक्टर

19 हजार से अधिक संविदा कंडक्टर

 

- बस में सिर्फ एक ड्राइवर, जबकि 400 किमी से अधिक दूरी की बस में दो ड्राइवर होने चाहिए

- रेग्युलर ड्राइवर था छुट्टी पर, नए ड्राइवर को नहीं पता था दिल्ली का रूट

- आलमबाग बस टर्मिनल से बैठे थे 40 यात्री, सबके टिकट ईटीएम से बने थे

- दुर्घटनाग्रस्त हुई एसी जनरथ बस को जाना था गाजीपुर

- पैसेजंर्स कम होने के कारण भेजी गई दिल्ली

lucknow@inext.co.in
LUCKNOW: सोमवार को दुर्घटना की जानकारी यात्रियों के परिजनों को मिली तो हाहाकार मच गया. इस दुर्घटना में राजधानी के भी पांच लोगों की मौत हुई है. बस में ड्राइवर कंडक्टर के साथ 52 लोग सवार थे. परिवहन निगम के अधिकारियों के इस दुर्घटना में 29 लोगों की मौत हो गई जबकि 23 लोग गंभीर रूप से घायल हैं. इन्हें आगरा के निजी नर्सिग होम में भर्ती कराया गया है.

गाजीपुर जानी थी बस
जानकारी के अनुसार रात दस बजे इस बस को आलमबाग से पैसेंजर्स को लेकर गाजीपुर जाना था. दस बजे तक बस में गाजीपुर के लिए मात्र दो पैसेंजर्स ही मिले जबकि दिल्ली के लिए बड़ी संख्या में पैसेंजर्स यहां बस का इंतजार कर रहे थे. ऐसे में अधिकारियों ने बस ड्राइवर को गाजीपुर की जगह दिल्ली जाने का आदेश दिया. तीन दिन बाद छुट्टी से लौटा ड्राइवर सवा दस बजे दिल्ली के लिए रवाना हो गया.

नहीं मालूम था रास्ता
अधिकारियों के अनुसार इस बस का रूटीन ड्राइवर विपिन कुमार छुट्टी पर था इसलिए कृपा शंकर चौधरी को बस को लेकर भेजा गया. गाजीपुर रूट पर चलने वाले इस बस ड्राइवर को दिल्ली के रास्तों की सही जानकारी नहीं थी. इस एक्सीडेंट से पहले कृपा शंकर चौधरी के नाम कोई एक्सीडेंट नहीं दर्ज है. ड्राइविंग के समय कृपा शंकर ना नशे में था और ना ही वह मोबाइल पर बात कर रहा था. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि सुबह तड़के साढ़े चार से पांच के बीच ड्राइवर को झपकी आई और इसी दौरान बस अनियंत्रित होकर एत्मादपुर के निकट रोड साइड रेलिंग तोड़ते हुए झरना नाले में जा गिरी.

नियमों से खेल रहे अफसर
रोडवेज के अधिकारी कमाई के चलते ड्राइवर्स और कंडक्टर्स की डयूटी से खिलवाड़ कर रहे हैं. नियमानुसार 400 किमी से अधिक का सफर होने पर बस में दो चालक भेजे जाएंगे. ऐसे में दिल्ली जाने वाली सभी बसों में सभी बसों में दो ड्राइवर्स भेजे जाने चाहिए लेकिन अधिकारी एक डाइवर के भरोसे ही दिल्ली के लिए बसें रवाना कर देते हैं. जबकि लखनऊ से दिल्ली की दूरी तकरीबन 600 किमी है.

ड्राइवर्स की ड्यूटी के नियम

- रेग्यूलर ड्राइवर्स और कंडक्टर्स को रोजाना आठ घंटे बस संचालन, एक महीने में 25 दिन डयूटी

- आठ घंटे बस संचालन के बाद 12 घंटे का रेस्ट करके ही डयूटी ज्वाइन कर सकता है ड्राइवर

- संविदा ड्राइवर्स और कंडक्टर्स को हर माह तय किलोमीटर और 22 दिन की ड्यूटी पर फिक्स वेतन

- संविदा ड्राइवर्स को 22 दिन की ड्यूटी में 5000 किलोमीटर का सफर करना होता है पूरा

- संविदा कंडक्टर को 24 दिन की ड्यूटी में 6000 किलोमीटर का सफर करना होता है पूरा

बसों की फिटनेस का नियम
रोडवेज की बसों में दो तरह से फिटनेस की जाती है. आरटीओ कार्यालय के यातायात पथ निरीक्षक सर्वेश चतुर्वेदी के अनुसार नए वाहनों का शुरूआत में दो वर्ष बाद फिटनेस परखी जाती है. इसके बाद हर साल फिटनेस कराना अनिवार्य होता है. फिटनेस के लिए आने वाली बसों में ब्रेक, हेडलाइट, रेफ्रो रिफ्लेक्टर टेप, वाइपर, फ्यूल टैंक के साथ ही बस की बॉडी की जांच की जाती है. जिस जनरथ बस का एक्सीडेंट हुआ वह दो साल पुरानी हो चु की थी. बीते एक अप्रैल को ही इस बस को फिटनेस दी गई थी और 31 मार्च 2021 तक यह फिटनेस वैध थी.

नहीं होती आंखों की चेकिंग
ड्राइवर्स की आंखों की जांच हर दो साल पर की जानी चाहिए. पिछले तीन साल में तीन आंखों की जांच के लिए कैंप लगाया गया.जांच के दौरान कई ड्राइवर्स ऐसे भी पाए गए जिनकी दूर की नजर कमजोर निकली तो कई को नजदीक की आई साइट ठीक नहीं मिली. डयूटी देने के दौरान इन ड्राइवर्स की आंखों का ध्यान नहीं रखा जाता है.

बस्ती का रहने वाला थ्ा ड्राइवर
जिस बस का एक्सीडेंट हुआ उसका ड्राइवर कृपा शंकर चौधरी बस्ती के ग्राम गिधार, पोस्ट भिटेहरा का रहने वाला था. 50 साल के इस ड्राइवर ने 2005 में रोडवेज मे रेग्यूलर ड्राइवर के रूप में नौकरी ज्वाइन की की थी.

 

मृतक आश्रितों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये यात्री राहत कोष से दिया जाएगा. बस में सफर करने वाले पैसेंजर्स को वयस्क टिकट धारी को पांच लाख और आधा टिकट धारक बच्चा यात्री को ढाई लाख रुपये यात्री राहत योजना से दिया जाएगा. वहीं गंभीर रूप से घायलों को ढाई लाख रुपए दिए जाएंगे.

राजेश वर्मा

मुख्य प्रधान प्रबंधक संचालन

 


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