Ahoi Ashtami 2019 संतान की दीर्घायु के लिए रखा जाता है ये व्रत इस तरह पूजा करने से मिलेगा फल

2019-10-21T09:42:44Z

अहोई अष्टमी व्रतकार्तिक कृष्ण पक्ष की सप्तमी या अष्टमी के दिन अर्थात जिस दिन दीपावली होउसके एक सप्ताह पहले रखा जाने वाला व्रत अहोई अष्टमी का व्रत कहलाता है।संतान की दीर्घायु एवं सुख समृद्धि के लिए मातायें अहोई माता की पूजा अर्चना करके यह व्रत रखती हैं।

इस बार अहोई अष्टमी व्रत दिनांक 21 अक्टूबर 2019,सोमवार को पड़ रहा है। इस दिन इस बार अष्टमी तिथि का छय है परंतु इस दिन,पुनर्वसु नक्षत्र, सिद्ध योग में व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होगा। इस व्रत के साथ ही दीपावली पर्व का आगमन हो जाता है।अहोईअष्टमी का व्रत करने वाली माताओं को इस दिन पूरे दिन निर्जल व्रत का पालन करना होता है।
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व्रत विधि

अहोई अष्टमी का व्रत करने के लिए प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठकर,स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।इसके बाद चौकी बनाकर चौकी रखने के बाद सबसे पहले एक कोरे करवे में पानी भर लें।गणेश जी की स्थापना करें, इसके बाद ही अहोई माता का चित्र रखें।चित्र का पूजन धूप दीप, और फूल से करें।पूरे दिन निर्जल व्रत करें।सांय काल में कुछ मीठा बनाकर माता को भोग लगाकर तारे दिखाई देने पर अहोई अष्टमी माता का फिर से पूजन किया जाता है और अहोई माता की कथा सुनी जाती है।कथा सुनने के बाद तारों को करवे से अर्ध्य दिया जाता है।संतान के हाथ से पानी पीकर व्रत का समापन किया जाता है।सास के पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है।जहां एक ओर करवाचौथ व्रत को महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं,वहीं अहोई अष्टमी संतान के दीर्घायु के लिए मनाया जाता है।

-ज्योतिषाचार्य पडित राजीव शर्मा

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Posted By: Vandana Sharma

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