ऐसे इंस्पेक्शन से क्या फायदा विशेष सचिव साहब?

2012-07-03T22:36:16Z

Kanpurअधिकारी आते हैं इंस्पेक्शन करते हैं और चाय नश्ता कर चले जाते हैं बिल्कुल इसी अंदाज में ट्यूजडे को हैलट हॉस्पिटल का इंस्पेक्शन किया विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा अरिंदम भट्टाचार्य ने साहब से पेशेंट्स ने अपना दुखड़ा रोया पर वो आश्वासनों को झुनझुना थमाकर चले गए उनको न तो जूनियर डॉक्टर्स की दबंगई दिखी और न ही पेशेंट्स का हाल

...आज तो बच गए
सुबह साढ़े दस बजे हैलट हॉस्पिटल के मेन गेट पर नीली बत्ती लगी कार से पूरे रौब में उतरे विशेष सचिव सीधे ओपीडी पहुंच गए. उनके साथ मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. आनंद स्वरूप और सीएमएस डॉ. सीएस सिंह भी थे. टीम जब सर्जरी डिपार्टमेंट पहुंची तो जूनियर डॉक्टर्स चाय पी रहे थे और पेशेंट्स दर्द से कराह रहे थे. उन्होंने डायग्नोसिस रजिस्टर चेक किया, जिसमें प्रॉपर एंट्री न होने पर गुस्सा भी जाहिर किया. इसके बाद पैथोलॉजी लैब का इंस्पेक्शन किया. यहां लोगों ने उनसे वार्ड ब्वॉय की कमी की शिकायत की. फिर इमरजेंसी वार्ड पहुंचकर पेशेंट्स का हालचाल लिया. इमरजेंसी से निकलने के बाद विशेष सचिव ने जच्चा-बच्चा हॉस्पिटल का इंस्पेक्शन किया. इंस्पेक्शन करके जैसे ही वो बाहर निकले गेट के पास खड़ा एक कर्मचारी बोला आज तो बच गए.

इमरजेंसी वॉर्ड की हालत खराब
पब्लिक की सुविधा के लिए नया इमरजेंसी वॉर्ड बनाया गया है. अभी इस वॉर्ड को पेशेंट्स के लिए नहीं खोला गया है पर उससे पहले ही इसकी हालत खस्ता हो गई है. एसी से पानी निकलकर बेड पर गिर रहा है, जिससे गद्दे के साथ-साथ वहां रखे इक्विपमेंट्स भी खराब हो रहे हैं. विशेष सचिव ने यहां का इंस्पेक्शन किया ये हाल देखा पर बिना कोई इंस्ट्रक्शंस दिए चले गए. खैर उनको इससे क्या मतलब झेलना तो पब्लिक को है.
गोल-मोल जवाब देने में माहिर
गेट पर पत्रकारों ने विशेष सचिव से जब जूनियर डॉक्टर्स की दबंगई के मामले पर सवाल पूछा तो वो बचते नजर आए. जब उनसे पूछा गया कि क्या पेशेंट्स और उनके तीमारदारों के साथ मारपीट की घटनाओं को रोकने के लिए कोई योजना बनाई जाएगी? तो उनका जवाब गोल-मोल रहा. उन्होंने कहा कि यहां पर मॉनीटरिंग वीक है और एक्शन नहीं लिया जा रहा है. कॉलेज के प्रिंसिपल के साथ बैठकर प्लानिंग की जाएगी.
दिखी हकीकत, गेट पर डिलीवरी
विशेष सचिव के इंस्पेक्शन के दौरान हीे हॉस्पिटल की पोल खुल गई. वो जच्चा-बच्चा हॉस्पिटल का इंस्पेक्शन कर रहे थे कि मेन गेट पर ही एक गर्भवती महिला दर्द से तड़प रही थी. सारे अधिकारी उनके आगे पीछे घूम रहे थे इसलिए महिला की सुध लेने वाला कोई नहीं था. महिला के परिजन डॉक्टर्स से गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने नहीं सुनी और हॉस्पिटल के गेट पर ही महिला की डिलीवरी हो गई.
...और बदल दी चादर
विशेष सचिव के हॉस्पिटल पहुंचने के करीब 10 मिनट पहले सभी वॉर्डो के बैड के चादर बदल दिए गए. पेशेंट्स ने आरोप लगाया है कि पिछले कई दिनों से गंदे बिस्तर पर पेशेंट्स को लेटने को मजबूर थे. लेकिन ट्यूजडे को अचानक चादर बदल दी गई. हर पेशेंट्स यही कह रहा था कि काश हर दिन अधिकारी यहां पर इंस्पेक्शन के लिए आते रहें.
साहब आए है, बाहर ही बैठो
ऐसा नहीं है कि विशेष सचिव के इंस्पेक्शन से सभी पेशेंट्स को फायदा ही हुआ हो. कुछ पेशेंट्स और उनके अटेंडेंट्स को परेशानी का भी सामना करना पड़ा. बेकनगंज कंघी मोहाल की रहने वाली नसीम बानो अपनी बहु बबली की डिलीवरी कराने हॉस्पिटल आई थी. उनकी बहु की डिलीवरी हो गई लेकिन उन्हें बहु से मिलने नहीं दिया गया. स्टॉफ ने उनसे कहा कि अभी साहब आए है, तुम बाहर ही बैठो, अंदर नहीं आना.
सिक्योरिटी की बात न कीजिए
हैलट हॉस्पिटल में सिक्योरिटी का  इंतजाम सिर्फ दिखावे के लिए है. जीएसवीएम कॉलेज समेत पांच हॉस्पिटल में मात्र 38 चौकीदार हैं. इनमें से एक चौथाई चौकीदार छुट्टी पर ही रहते हंै. ऐसे में सिक्योरिटी भगवान भरोसे ही है. खैर विशेष सचिव ने इस मामले में प्रिसिंपल को रिपोर्ट तैयार करने का वही पुराना निर्देश दिया. उन्होंने ड्रेस न पहनने पर एक चौकीदार को फटकार लगाकर अपना काम पूरा कर दिया.
वो बेचारे करते रहे शिकायत
विशेष सचिव से पेशेंट्स और उनके तीमारदारों ने एक नहीं कई शिकायतें की लेकिन उन्होंने सुनकर आश्वासन दे दिया. किसी ने कहा यहां पीने का पानी नहीं उपलब्ध है तो किसी ने डॉक्टरों के बिहेवियर की शिकायत की. जब पेशेंट्स उनसे शिकायत कर रहे थे तो प्रिसिंपल और हॉस्पिटल के दूसरे अधिकारी भी मौजूद थे. इतनी शिकायत के बाद भी जब उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया तो प्रिसिंपल साहब ने सोचा कि आज तो बच गए.
इन पर कौन देगा ध्यान?
-जूनियर डॉक्टर्स की दबंगई
-जच्चा-बच्चा हॉस्पिटल में कई महीनों से वॉटर कूलर खराब हैं
-अल्ट्रासाउंड के दो और ओटी के दर्जनों एसी खराब हैं
-हॉस्पिटल में पंखे तक नहीं लगे हैं
-पेशेंट्स के तीमारदारों के बैठने के लिए चेयर तक नहीं हैं
-हॉस्पिटल में तीमारदारों के लिए एक भी रैन बसेरा नहीं बनाया गया है
-हॉस्पिटल के पीओपी डिपार्टमेंट के बाहर कूड़ा घर बना हुआ है
-पेशेंट्स के लिए पर्याप्त मात्रा में बैड नहीं है, एक बैड पर दो-दो पेशेंट्स को रखा जाता है
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बाहर की दवाइयां लिखते हैं डॉक्टर
विशेष सचिव को इंस्पेक्शन के दौरान एक सावित्री नाम की महिला ने रोक लिया. उसने विशेष सचिव को बताया कि डॉक्टर बाहर की दवाइयां लिखते हैं. सरकारी हॉस्पिटल में गरीब आदमी इलाज कराने आता है लेकिन यहां पर गरीबों की कोई नहीं सुनता है. बाहर से जबरदस्ती दवाइयां मंगाई जाती हैं.
ऑक्सीजन प्लांट लगेगा
इंस्पेक्शन के दौरान विशेष सचिव ने बताया ऑक्सीजन सिलेंडर की  समस्या को दूर करने के लिए जल्द ही हॉस्पिटल परिसर में एक लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने का झुनझुना बजा दिया.
मेरे बेटे को किडनी की प्रॉब्लम है. हमारी फाइनेंशियल कंडीशन अच्छी नहीं है. डॉक्टरों ने सभी मेडिसिन बाहर से लिख दी हैं.
          कमला सिंह, लालबंगला
मेरी बहू वॉर्ड में अकेली है. डॉक्टरों ने मुझे बाहर कर दिया है. उन्होंने बताया कि बड़े साहब आए हैं, इसलिए तुम बाहर ही बैठो.
          नसीम बानो, बेकनगंज
मेरी बहन दो दिनों से यहां एडमिट है. हम लोग पीने के पानी के लिए परेशान हो गए हैं. लोगों को उबलता हुआ पानी पीने को मिल रहा है. मजबूरी में घर से ठंडा पानी लाना पड़ा.
          प्रीति यादव, बिल्हौर
Report By: Dheeraj Sharma



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