सभी मेडिकल कॉलेजों को मिलेगी एक यूनिवर्सिटी से डिग्री

2019-01-20T06:00:10Z

- आयुर्वेद को ब्राडिंग की बहुत जरूरत

- आयुर्वेद पर्व में शामिल होने कानपुर पहुंचे सीएम की घोषणा

- आयुर्वेद के आगे ने बढ़ पाने पर जताई चिंता, कहा आयुर्वेद को तगड़ी ब्रांडिंग की जरूरत, इसके मर्म को आमजन तक पहुंचाना होगा

- प्रदेश में 10 करोड़ से पहला आयुर्वेद विश्वविद्यालय खोलने की भी चल रही तैयारी, बजट की नहीं होगी कोई कमी

KANPUR@inext.co.in

KANPUR: इंजीनियरिंग की तर्ज पर अब प्रदेश के सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों को एक यूनिवर्सिटी से जोड़ा जाएगा। मेडिकल कॉलेज कोई भी हो लेकिन पास होने स्टूडेंट को एक ही यूनिवर्सिटी की डिग्री मिलेगी। यह यूनिवर्सिटी भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री स्व। अटल बिहारी बाजेपेयी के नाम पर होगी। शनिवार को यह घोषणा कानपुर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की। वह आयुर्वेद पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने शहर आए थे। इस दौरान उन्होंने आयुर्वेद की स्थिति पर भी अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सक संकोच बहुत करते हैं। उनकी संकोच की वजह से देश में आयुर्वेद शीर्ष स्थान पर नहीं पहुंच पाया। आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए तगड़ी ब्रांडिंग की जरूरत है। क्योंकि जिसका ब्रांडिंग अच्छी होती है, उसका प्रोडक्ट भी उतना ही अच्छा माना जाता है।

खुलेंगे आयुर्वेद के कॉलेज

सीएम ने कहा कि प्रदेश में अलग से आयुर्वेद विश्वविद्यालय बनाने की कार्ययोजना बनाई जा रही है, इसके लिए इस बार बजट में प्रावधान करेंगे। सीएम ने अधिकारियों को चेताया कि जो आयुर्वेद कॉलेज अच्छा कार्य कर रहे हैं, उन्हें मान्यता के लिए न लटकाया जाए, तुरंत मान्यता दी जाए।

आयुर्वेद में कुछ मिश्ाण न हो

सीएम ने अपने संबोधन की शुरूआत गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ से करते हुए कहा कि वहां 1970 में आयुर्वेद कॉलेज था। उनके गुरुदेव ने इस कॉलेज को इसलिए बंद कराया क्योंकि सिर्फ आयुर्वेद से उपचार नहीं हो रहा था। उनके अनुसार दवाओं में अलग दवाईयों का मिश्रण नहीं करना चाहिए। इस काम में कॉलेज विफल रहा तो उसे बंद कराया गया। आज वहां एलोपैथ का 350 बेड का अस्पताल है। अब वहां अलग से आयुर्वेद के विस्तार की प्रक्त्रिया अमल में लाई जा रही है।

किसान बनाएं हर्बल गार्डेन

सीएम ने आयुर्वेद को किसानों से जोड़ते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व देश के कई अन्य हिस्सों में आयुर्वेद को लेकर अपार संभावनाएं हैं। किसान हर्बल गार्डन से अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं। आयुष मंत्रालय के अधिकारियों पर औषधीय खेती की कार्ययोजना बनाने को कहा। बताया कि प्रदेश में 100 स्थानों पर वेलनेस सेंटर खोले जा रहे हैं। जहां आयुर्वेद चिकित्सक नियुक्त किए जाएंगे। देश में मेडिकल टूरिज्म की आधारशिला आयुर्वेद की वजह से बनी थी। योग के साथ आयुर्वेद ही इसे आगे बढ़ा सकता है।

ये विशिष्ट अतिथि रहे मौजूद

केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभारर) श्रीपद यशो नाइक, प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, एमएसएमई मंत्री सत्यदेव पचौरी, आयुष मंत्री धर्मसिंह सैनी, सांसद डॉ। मुरली मनोहर जोशी, देवेंद्र सिंह भोले, महापौर प्रमिला पांडेय, आयुर्वेद संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र त्रिगुणा, आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा

आंकड़ों में यूपी आयुष विभाग

-22 महीने पहले प्रदेश में आयुष विभाग बना।

-15 जिलों में 15 आयुष गांव चुने जा चुके हैं।

-50 बेड के आयुर्वेद हॉस्पिटल खोले जा रहे हैं।

-16 आयुर्वेद चिकित्सालय बनाए जा चुके हैं।

-10 करोड़ से यूपी में बनेगा आयुर्वेद विश्वविद्यालय।

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आयुष मंत्रालय को इतना बजट

-730 करोड़ का बजट 2016 में आयुष मंत्रालय को मिला था।

-1670 करोड़ का बजट 2107 में आवंटित किया गया था।

-3000 करोड़ का बजट 2018 में जल्द होने वाला है जारी।

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टाइम लाइन

-11.21 बजे सुबह सीएम सीएसए हेलिपैड पर उतरे।

-11.47 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचे।

-11.50 बजे आयुर्वेद प्रदर्शनी का निरीक्षण।

-12.55 बजे सीएम ने संबोधन शुरू किया।

-1.16 बजे तक सीएम का संबोधन खत्म।

-1.46 बजे सीएसए हेलिपैड से रवाना हुए। सीएम ने आयुर्वेद से बनी दवाइयों की प्रदर्शनी को भी देखा।


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