बस तीन सवाल जांच कर पूरी काॅपी में दिए नंबर जांचकर्ता पर लगा एक लाख रुपये का जुर्माना

2019-05-24T11:01:52Z

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आगरा विवि से कहा अयोग्य और गैर जिम्मेदार परीक्षक की नियुक्ति न करे

prayagraj@inext.co.in

PRAYAGRAJ: परीक्षक ने सिर्फ तीन क्वैश्चंस को चेक किया और पूरी कापी की मार्किंग मेंशन कर दी. इससे छात्र का नुकसान हो गया. यूनिवर्सिटी में सुनवाई नहीं हुई तो छात्र इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच गया. कोर्ट ने तथ्यों को परखने के बाद मेडिकल छात्र की उत्तर पुस्तिका का गलत मूल्यांकन करने पर बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय पर एक लाख रुपये हर्जाना लगाया है.

परीक्षक से वसूलने की छूट
कोर्ट ने विश्वविद्यालय से कहा है कि हर्जाने की राशि वह याची को दे. वह चाहे तो बाद में नियमानुसार जांच कराने के बाद दोषी परीक्षक से यह राशि वसूल सकता है. कोर्ट ने प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा को भी निर्देश दिया है कि वह परीक्षकों की तैनाती करते समय विशेष ध्यान रखें कि योग्य लोग ही कांपियों का मूल्यांकन करें. याचिका पर अधिवक्ता सेन अब्बास ने पक्ष रखा. मेडिकल स्टूडेंट देवेश कुमार गुप्ता की याचिका पर यह आदेश जस्टिस सुधीर अग्रवाल और रामेन्द्र कुमार की पीठ ने दिया.

आगरा मेडिकल कालेज के छात्र की याचिका
कोर्ट ने कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली में छात्र की योग्यता का मूल्यांकन उसे परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर होता है. इसलिए परीक्षक की विशेष जिम्मेदारी है. क्योंकि, छात्र का पूरा भविष्य उसके हाथों में रहता है. कोर्ट ने विवि से अपेक्षा की है कि भविष्य में वह ऐसे गैर जिम्मेदार अयोग्य और लापरवाह परीक्षकों की नियुक्ति नहीं करेगा. याची एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में एमबीबीएस का छात्र है. फिजियोलॉजी विषय में उसे मात्र 6 अंक दिए गए जिसे उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी. मूल उत्तर पुस्तिका मांगने पर पता चला कि सिर्फ तीन प्रश्नों को जांचा गया और शेष बिना जांचे छोड़ दिए गए. कोर्ट के आदेश पर पुन:मूल्यांकन में याची को 20 से अधिक अंक मिले.

Posted By: Vijay Pandey

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.