मस्तिष्क की उपज है भ्रष्टाचार

2019-10-31T06:01:25Z

-आईआईआईटी में विजिलेंस अवेयरनेस वीक में जागरूकता एवं पारदर्शी शासन पर सेमिनार

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PRAYAGRAJ: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में चल रहे विजिलेंस अवेयरनेस वीक में बुधवार को जागरूकता एवं पारदर्शी शासन पर सेमिनार ऑर्गनाइज किया गया। इस मौके पर संस्थान के डायरेक्टर प्रो। पी। नागभूषण ने कहा कि भ्रष्टाचार मस्तिष्क की उपज है। उदाहरण के साथ बताया कि यदि मेडिकल अस्पताल में किसी पेशेंट को एडमिट करना होता है तो उसके लिए बेड हेतु सिफारिश करनी पड़ती है। उन्होंने कहा जब तक हम लोग अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर देशहित या संस्थान के हित में कार्य नहीं करेंगे तब तक करप्शन समाप्त नहीं हो सकता है।

हाल के वर्षो में देश में बढ़ा भ्रष्टाचार

सेमिनार में विचार व्यक्त करते हुए डायरेक्टर ने सतर्कता आयोग के गठन की पृष्ठभूमि का उल्लेख किया। बताया कि केन्द्रीय सतर्कता आयोग के गठन किसी संगठन में उद्यमता, निष्पक्षता तथा ईमानदारी को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गयी है। हाल के वषरें में देश में भ्रष्टाचार की समस्या ने विकराल रूप धारण किया है। उन्होंने महात्मा गांधी और अब्राहम लिंकन का उदाहरण देते हुए कहा कि जो आदमी दूसरे को उपदेश देता है उसे उसको जीवन में लागू करना चाहिए। प्रो। उमाशंकर तिवारी ने बताया हमें उस जड़ तक पहुचना होगा कि भ्रष्टाचार कहां से होता है। अन्य वक्ताओं ने भी सेमिनार में अपने विचार व्यक्त किये।

Posted By: Inextlive

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