और हवा में उड़ गया ग्लाइडर

2013-10-05T09:05:06Z

Allahabad इंजीनियरिंग की एबीसीडी सीख रहे टेक्नोक्रेट्स के लिए खुद के बनाए ग्लाइडर्स को हवा में उड़ाना आसान नहीं था इससे भी कठिन था उन्हें हवा में बैलेंस्ड रखकर टफ टास्क को पूरा करना एमएनएनआईटी में चल रहे टेक्नो फेस्ट अविष्कार के तीसरे दिन स्टूडेंट्स ने जब ये चैलेंज करके दिखाया तो सभी ने दांतों तले उंगली दबा ली उन्होंने यह कारनामा एयरो मॉडल इवेंट के दौरान अंजाम दिया

Balance का था पूरा खेल
इवेंट में करीब 20 टीमों ने पार्टिसिपेट किया था. इसमें से 18 इंस्टीट्यूट की और बाकी दो टीमें लखनऊ और देहरादून की थीं. प्रत्येक टीम ने खुद रिमोट ऑपरेटेड ग्लाइडर तैयार किए थे. स्टूडेंट्स को हवा में ही अपने ग्लाइडर को बैलेंस कर टफ टास्क पूरे करने थे. इनमें से दो पोल के बीच में से ग्लाइडर को निकालना बेहद कठिन था, जिसे पूरा करने में स्टूडेंट्स के माथे पर बल पड़ गए. इसके अलावा गोल पोस्ट के नीचे से ग्लाइडर को ऑपरेट करना भी सभी के लिए आसान नहीं था. सरप्राइजिंग तो तब रहा जब दूसरे शहरों की टीमों के ग्लाइडर अपना टास्क पूरा करने से पहले ही क्रैश हो गए.

6400 रुपए का था एक glyder

इवेंट कोआर्डिनेटर सोल्विन ने बताया कि ये काफी टेक्निकल इवेंट है इसलिए इसके लिए कुछ दिनों पहले एक वर्कशॉप आर्गनाइज की गई थी, जिसमें ग्लाइडर तैयार करने के टिप्स दिए गए थे. इस दौरान बताया गया कि किस तरह से कोरो मटेरियल यानी प्रिटिंग में यूज होने के सामान से हल्का ग्लाइडर तैयार किया जाता है. फिर इसे सेंसर, बैटरी और सर्वो मोटर के जरिए रिमोट से ऑपरेट किया जाता है. इस तरह से ग्लाइडर तैयार करने में तकरीबन 6400 रुपए का खर्च आया है. उन्होंने बताया कि इस इवेंट के लिए उन्हें प्रशासन या आर्मी की परमिशन नहीं लेनी पड़ती है, इसे ऐज ए हॉबी ऑर्गनाइज किया जाता है. अब सैटरडे को सीनियर्स भी अपने ग्लाइडर उड़ाकर सभी का एंटरटेनमेंट करेंगे. एयरो मॉडल इवेंट में देवेश तोमर को फस्र्ट, अश्विनी व कुलदीप को सेकंड और सचिन कुमार को थर्ड विनर सेलेक्ट किया गया.
Robotics में भी हुआ धमाल

फ्राइडे को आविष्कार के दूसरे इवेंट रेाबोटिक्स में भी जमकर धमाल हुआ. अलग-अलग टीमों द्वारा बनाए गए रोबोट्स ने टफ टास्क पूरे कर ऑडियंस को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया. सबसे ज्याद एक्साइटिंग रहा ऑटोनोमस रोबोट्स द्वारा हर्डल्स पूरा करते हुए अपने टारगेट को एचीव करना. स्टूडेंट्स द्वारा डिजाइन किए गए रोबोट्स ने सेट प्रोग्रामिंग के जरिए लंबा सफर तय किया. इवेंट में कुल 60 टीमें इंस्टीट्यूट की और 30 दूसरे इंजीनियरिंग कॉलेजेस की थीं. इवेंट कोआर्डिनेटर शशांक ने बताया कि रोबोट्स को माइक्रो कंट्रोलर, मोटर्स और सेंसर के जरिए तैयार किया जाता है. कुछ रोबोट मैनुअली ऑपरेट किए जाते हैं तो कुछ ऑटोनोमस होते हैं. ऑडियंस ने प्रेग्रिड, रोबोसेवियर, रोबोड्राइड और टिनटिन जैसे टॉस्क को खूब एंज्वॉय किया. इवेंट का फाइनल सैटरडे को ऑर्गनाइज होगा.



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