शाम हो या सवेरा छुट्टा पशुओं का डेरा

2019-02-04T06:00:40Z

-शहर की बड़ी समस्या बने हैं छुट्टा पशु

-तमाम बनी योजनाएं लेकिन कोई नहीं हुई कारगर

बनारस की एक बड़ी समस्या छुट्टा पशु हैं। सड़क-गली से लेकर कालोनी-मोहल्ला हर जगहों पर छुट्टा पशुओं का डेरा है। आवागमन को बाधित करने के साथ ही लोगों पर हमला भी करते हैं। कई लोगों की जान तक ले चुके हैं। बावजूद इन्हें शहर से बाहर नहीं किया गया। हजार शिकायतों के बाद भी इनसे निजात दिलाने के लिए नगर निगम के पास कोई ठोस प्लान नहीं है। जब वीवीआईपी दौरा होता है, तब छुट्टा पशुओं को पकड़ने वाली टीम सड़क पर दिखती है।

कान्हा उपवन कब होगा पूरा

छुट्टा पशुओं को रखने के लिए शासन की ओर से कान्हा उपवन तैयार कराया जा रहा है। मगर, अभी उसमें काफी समय है। करसड़ा के छितौनी गांव में लगभग 550 जानवरों की क्षमता का बन रहे कान्हा उपवन का काम अभी 50 परसेंट भी पूरा नहीं हो सका है। दस एकड़ की भूमि 11 करोड़ की लागत से बन रहे कान्हा उपवन में छुट्टा पशुओं को रखने के अलावा गाय को गोद भी लिया जा सकता है। इसके बन जाने के बाद शायद उम्मीद है कि छुट्टा जानवरों से राहत मिल जाए। नगर निगम के पास दो कांजी हाउस अर्दली बाजार व नक्खीघाट हैं। इनमें 50 से अधिक जानवरों को नहीं रख सकते। यही कारण है कि छुट्टा पशुओं को नगर निगम नहीं पकड़ता है। गांव में फसलों को नष्ट करने वाले छुट्टा जानवरों को किसान शहर की ओर हांक देते हैं। शहर में आते ही पशु प्रमुख मार्केट, मंडियों में जमा हो जाते है।

एक नजर

8,93456

जिलें में कुल पशु

2,40711

गोवंश की संख्या

179522

मुर्गा, कुक्क्ट व अन्य

162090

बकरी की संख्या

16062

भेड़ों की संख्या

2,95072

अन्य पशुओं की संख्या

25,000

से अधिक शहर में छुट्टा पशुओं की संख्या

छुट्टा पशुओं की संख्या दिनों-दिन शहर में बढ़ती जा रही है। लोगों को जख्मी करने के साथ ही दुकान के सामने लगे डस्टबीन तक तोड़ दे रहे है।

सौरभ जायसवाल, थ्रू फेसबुक

सबसे अधिक परेशानी तब होती है, जब आप जाम में फंसे हों और सांड लड़ते हुए पास पहुंच जाएं। भगदड़ जैसी स्थिति रहती है। अमूमन ऐसी सिचुएशन से रोजाना गुजरता हूं।

लाल बहादुर, थ्रू फेसबुक

नगर निगम की लापरवाही से शहर में आवारा पशुओं का डेरा है। जब वीवीआईपी का मूवमेंट होता है तभी इन्हें पकड़ा जाता है। रोजाना ऐसे अभियान चलाकर पकड़ा जाए तो अवारा पशुओं की भीड़ खत्म हो शहर से

मनीष चौबे, थ्रू फेसबुक

छुट्टा पशुओं की वजह से हर दिन घटनाएं हो रही हैं फिर भी जिला प्रशासन कोई एक्शन नहीं ले रहा है। अभियान चलाकर इन्हें पकड़ना चाहिए।

रोहित मिश्रा थ्रू फेसबुक


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