अनवर इब्राहिम समलैंगिकता के आरोपों से बरी

2012-01-09T11:15:00Z

दो साल चली सुनवाई के बाद मलेशिया की एक अदालत ने विपक्ष के नेता अनवर इब्राहिम को समलैंगिक संबंध बनाने के आरोप से बरी कर दिया है

फ़ैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ज़ाबिदीन मोहम्मद दियाह ने कहा कि जमा कराए गए डीएनए सबूत पर भरोसा नहीं किया जा सकता था. आरोपों को ख़ारिज करते हुए अनवर हमेशा कहते रहे हैं कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं.

'सोडोमी' यानि गुदा मैथुन मलेशिया में ग़ैर-क़ानूनी है लेकिन राजधानी कुआलालम्पुर में मौजूद बीबीसी संवाददाता के अनुसार बहुत कम लोगों को ही इसमें सज़ा मिलती है.

'न्याय की जीत'

अनवर पर अपने पूर्व सहयोगी के साथ ये संबंध बनाने का आरोप था. अगर वह दोषी पाए जाते तो उन्हें 20 साल तक की जेल हो सकती थी. लेकिन न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे सवाल उठ रहे थे कि क्या डीएनए सबूत से छेड़छाड़ की गई थी.

अदालत ने कहा, ''पूरे सबूतों के अभाव में अदालत यौन संबंध मामलों में किसी को दोषी क़रार देने से परहेज़ करती है.'' अदालत के बाहर इब्राहिम की पत्नी और बच्चों समेत उनके समर्थकों ने फ़ैसले का ज़ोरदार स्वागत किया.

अनवर ने पत्रकारों से कहा, ''ख़ुदा का शुक्र है कि न्याय की जीत हुई है और मैं निर्दोष ठहराया गया हूँ. सच तो यह है कि मैं थोड़ा हैरान हूँ.'' सूचना मंत्री रायेस यतिम ने कहा कि यह साबित करता है कि न्यायाधीशों को निष्पक्ष तरीक़ै से फ़ैसला करने का हक़ था.

पूर्व उप-प्रधानमंत्री

अनवर के ख़िलाफ़ यह आरोप साल 2008 में चुनाव के कुछ ही महीनों बाद लगा था. उनके नेतृत्व में विपक्ष को उन चुनाव में बड़ा फायदा हुआ था.

यह फैसला साल 2013 में होने वाले चुनाव से कुछ पहले आया है. हालांकि चुनाव इसी साल कराए जाने की संभावना है. अनवर एक समय पर मलेशिया के उप प्रधानमंत्री थे और पूर्व नेता महातेर मोहम्मद के साथी थे. लेकिन महातेर मोहम्मद से उनके रिश्ते ख़राब हो गए थे और बाद में उन्हें भ्रष्टाचार और समलैंगिक संबंध के मामले में जेल भेजा गया था.

हालांकि यौन संबंध के मामले में उनकी सज़ा बाद में रद्द कर दी गई थी और छह साल जेल में बिताने के बाद साल 2004 में उन्हें रिहा किया गया था. मलेशिया के विपक्षी गठबंधन में उन्हें ही सबसे अहम भूमिका में देखा जा रहा है. इस गठबंधन के पास संसद में एक तिहाई सदस्य हैं.

मलेशिया में सत्तारूढ़ दल पिछले 50 वर्षों से सत्ता में है और बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ अनवर ही उनके प्रभुत्त्व को चुनौती देने वाले एकमात्र व्यक्ति दिख रहे हैं.


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