जम्मूकश्मीर के किश्तवार में बीजेपी नेता की हत्या के बाद स्थिति तनावपूर्ण सेना ने किया फ्लैगमार्च

2018-11-02T15:48:01Z

जम्मूकशमीर के किश्तवार में गुरुवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता और उनके भाई की हत्या कर दी गई। इसके बाद वहां स्थिति तनावपूर्ण है।

जम्मू (पीटीआई)। जम्मू-कशमीर के किश्तवार में गुरुवार की रात संदिग्ध आतंकवादियों ने एक वरिष्ठ भाजपा नेता और उनके भाई की हत्या कर दी थी, जिसके बाद वहां कर्फ्यू लगा दिया गया। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि इस हत्या को लेकर किश्तवार में सेना ने एक फ्लैगमार्च किया। किश्तवार के जिला मजिस्ट्रेट अंग्रेज सिंह राणा ने पीटीआई को बताया कि स्थिति तनावपूर्ण है लेकिन नियंत्रण में है। उन्होंने बताया, 'कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेना ने किश्तवार शहर में एक फ्लैगमार्च किया।' उन्होंने कहा कि गुरुवार देर रात शहर में लगाए गए कर्फ्यू अभी भी सख्ती से लागू हैं और शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।
सेना से किया था अनुरोध
राणा ने कहा कि अभी तक किसी भी घटनाओं की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। किश्तवार के एसएसपी राजिंदर गुप्ता ने बताया कि इस मामले में शामिल लोगों को ट्रैक करने के लिए खोजबीन शुरू हो गई है। बीजेपी के राज्य सचिव अनिल परिहार(52) और उनके भाई अजीत परिहार(55) की आतंकवादियों द्वारा हत्या किये जाने के बाद, लोगों ने गुस्से में सांप्रदायिक रूप से जमकर विरोध प्रदर्शन किया और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ हाथापाई भी की। इसके बाद जिला मजिस्ट्रेट ने शहर के आस-पास के इलाकों में हत्याओं के कारण उत्पन्न होने वाली हिंसा को नियंत्रित करने के लिए सेना से अनुरोध किया था।
दुकान बंद कर वापस घर लौट रहे थे दोनों भाई
बता दें कि किश्तवार में वरिष्ठ भाजपा नेता और उनके भाई की हत्या तब हुई, जब वे पुरानी डीसी ऑफिस कॉम्लेक्स में स्थित अपनी स्टेशनरी की दुकान को रात में बंद करके वापस घर लौट रहे थे।  जैसे ही दोनों ने परिहार मोहाल्ला में स्थित अपने घर की तरफ बढ़ने के लिए तपल मोहल्ला में अंधेरे रास्ते को चुना, तभी शाम 8.40 बजे संदिग्ध आतंकवादियों ने उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया। लोग गोलियों की आवाज सुनकर तुरंत मौके पर पहुंचे और उन्हें किश्तवार के जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि आतंकी काफी देर से दोनों भाइयों के घर लौटने की राह देख रहे थे। गौरतलब है कि अनिल परिहार 25 वर्षों से अधिक समय तक राजनीति में सक्रिय थे और जम्मू कश्मीर के 2008 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर पार्टी (जेकेएनपीपी) की टिकट पर चुनाव भी लड़ा था लेकिन जीत नहीं पाए। इसके अलावा अनिल के भाई अजीत परिहार राज्य वन निगम (एसएफसी) के कर्मचारी थे।

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