अंगुली बताती है पॉलीथिन प्रतिबंधित है या नहीं

2018-07-24T06:00:36Z

-शहर में प्रतिबंधित पॉलीथिन पर रोक के लिए निकले अधिकारियों के पास नहीं है माइक्रो मीटर

-व्यापारियों से आए दिन हो रहा विवाद, अधिकारियों पर वसूली का भी लगाया जा रहा आरोप

ALLAHABAD: 15 जुलाई से 50 माइक्रोन से नीचे के कैरीबैग पर प्रतिबंध के बाद पॉलीथिन कंपनियों ने 51 माइक्रोन व उससे अधिक माइक्रोन के कैरी बैग को मार्केट में उतारा है। लेकिन जांच के लिए निकले नगर निगम के अधिकारी इसे भी प्रतिबंधित पॉलीथिन बताते हुए जुर्माना लगा रहे हैं। इसके साथ ही पैकिंग पॉलीथिन पर प्रतिबंध न होने के बाद भी उसे जब्त किया जा रहा है। इसे लेकर व्यापारियों और अधिकारियों में विवाद हो रहा है। व्यापारी पकड़े गए पॉलीथिन को फैक्ट्री सील-मोहर के आधार पर वैध बता रहे हैं। वहीं अधिकारी माइक्रो मीटर या फिर गेज मीटर से जांच किए बगैर अंगूली से चेक कर व अनुभव के आधार पर पॉलीथिन को प्रतिबंधित बता रहे हैं।

गायब है प्रतिबंधित पॉलीथिन

शहर के दुकानदारों ने प्रतिबंधित पॉलीथिन नगर निगम में सरेंडर भले ही नहीं किया है, लेकिन सच यही है कि 15 जुलाई के बाद प्रतिबंधित पॉलीथिन की शहर में खुलेआम हो रही बिक्री करीब-करीब बंद है। यही कारण है कि लगातार हो रही कार्रवाई और छापेमारी के बाद भी निगम अधिकारियों को कहीं भी बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित पॉलीथिन नहीं मिल रहा है।

मीटर से जांच के बाद हो कार्रवाई

प्रदेश सरकार ने निगम अधिकारियों को प्रतिबंधित पॉलीथिन पर प्रतिबंधि लगाने का अधिकार तो दे दिया, लेकिन प्रतिबंधित पॉलीथिन की जांच के लिए माइक्रो मीटर या गेज मीटर नहीं दिया। अब ये विवाद का कारण बनने के साथ अभियान फेल होने का कारण भी बन रहा है।

ये है शासनादेश

15 जुलाई से पंद्रह अगस्त और दो अॅक्टूबर तक 50 माइक्रोन से नीचे के पॉलीथिन कैरी बैग की बिक्री और इस्तेमाल पर है पूर्ण प्रतिबंध।

- पंद्रह अगस्त के बाद थर्माकोल से बने प्लास्टिक, कप प्लेट और गिलास का भी इस्तेमाल कर सड़क पर फेंकना रहेगा प्रतिबंधित।

- दो अक्टूबर के बाद 50 माइक्रोन से उपर के पॉलीथिन भी हो जाएंगे प्रतिबंधित।

- दो अक्टूबर तक पैकिंग पॉलीथिन फिलहाल नहीं आ रहे हैं कार्रवाई की जद में।

बॉक्स

माना कि नहीं है कोई मीटर

पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने की जिम्मेदारी संभाल रहे सहायक नगर आयुक्त ओम प्रकाश से पूछा गया कि पॉलीथिन कैरी बैग प्रतिबंधित है या नहीं, इसकी जांच निगम अधिकारी व कर्मचारी कैसे करते हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इलाहाबाद में किसी भी अधिकारी व कर्मचारी के पास पॉलीथिन की जांच के लिए माइक्रो मीटर नहीं है। लेकिन कौन सा पॉलीथिन प्रतिबंधित है, इसका पता लगाने के लिए ट्रेंड किया गया है।

कॉलिंग

जिस दुकान में अधिकारी जांच कर रहे हैं, वहां जुर्माना लगाने के बाद व्यापारी को रसीद नहीं दे रहे हैं। जबकि डीएम ने स्पष्ट आदेश दिया है कि अगर कोई अधिकारी रसीद न दे तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

अमित साहू

डिस्पोजेबल सामान 50 माइक्रोन से ऊपर प्रतिबंधित नहीं है। जबकि प्लास्टिक और थर्माकोल से बने गिलास, प्लेट आदि रिसाइक्लेबल है। इसके बाद भी इसे बैन किया जा रहा है। जबकि हकीकत यह है नगर निगम वेस्ट मैनेजमेंट नहीं कर पा रहा है।

आशीष मित्तल

डिस्पोजेबल सामान जब 15 अगस्त से प्रतिबंधित है, तो अभी से एनाउंसमेंट कर प्रतिबंधित क्यों किया जा रहा है। खरीदने पर एक लाख रुपए जुर्माना की धमकी दी जा रही है। इसकी वजह से डिस्पोजेबल सामान की बिक्री बंद हो गई है।

रघुनाथ अग्रवाल

प्लास्टिक से आखिर दिक्कत क्या है? हम चैलेंज के साथ चर्चा को तैयार हैं। नाली में पॉलीथिन ही नहीं, कोई कचरा नहीं जाना चाहिए। नाली जब सीवर में मिले तो उस पर जाली लगा होना चाहिए।

मो। महमूद


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