अयोध्या मामला सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के जरिए समाधान पर सुरक्षित रखा फैसला

2019-03-06T13:43:26Z

उत्तर प्रदेश में राम जन्मभूमिबाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले का क्या मध्यस्थता के जरिए समाधान किया जा सकता है। इस मामले में मध्यस्थता हो या नहीं इस पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवार्इ हुर्इ। इस दाैरान कोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

नर्इ दिल्ली (पीटीआर्इ)। राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि मामले में मध्यस्थता के जरिए समाधान होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवार्इ हुर्इ। इस दाैरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जस्टिस एस ए बोबडे, डी वाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस ए नाजीर की संविधान पीठ ने सुनवार्इ की। हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने अपनी बात रखी।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया

सभी पक्षाें को सुनने के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोर्इ ने इस मामले के पक्षकारों से मध्यस्थता करने वालों के नामों का सुझाव देेने की बात कही। न्यूज एजेंसी एनआर्इ के मुताबिक चीफ जस्टिस रंजन गोगोर्इ ने कहा कि वह इस मामले में जल्द से जल्द फैसला सुनाना चाहते हैं। इसके बाद राम जन्मभूमि विवाद पर मध्यस्थता हो या नहीं इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
सुप्रीम कोर्ट में चौदह अपील दायर की गई
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम जन्मभूमि आैर बाबरी मस्जिद भूमि मामले में 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चौदह अपील दायर की गई हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या में 2.77 एकड़ भूमि को तीन दलों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लल्ला के बीच समान रूप से विभाजित किए जाने का आदेश दिया था।

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