आजम खान को जौहर संपत्ति के प्रमुख पद से हटाया गया

Updated Date: Fri, 29 May 2020 01:42 PM (IST)

सपा सांसद आजम खान को उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जौहर संपत्ति के प्रमुख पद से हटा दिया है। बता दें आजम इस समय परिवार सहित जेल में बंद हैं।

लखनऊ (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के सांसद मोहम्मद आजम खान को एक बड़ा झटका लगा है। उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने वक्फ संख्या 157 का प्रत्यक्ष नियंत्रण आजम से ले लिया है, जिसे आमतौर पर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से संबंधित भूमि के रूप में जाना जाता है। बोर्ड के अध्यक्ष ने अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए वक्फ को एक प्रशासक-कार्यकारी अधिकारी जुनैद खान के अधीन कर दिया है, जो अब अगली सूचना तक पांच साल की अवधि के लिए पांच एकड़ से अधिक वक्फ संपत्ति का प्रबंधन करेगा।

मार्च में लिया गया था निर्णय

यह निर्णय मार्च में लिया गया था, इसे लॉकडाउन के कारण वितरित नहीं किया जा सका। जुनैद खान को हाल ही में बोर्ड का पत्र प्राप्त हुआ। आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, सुन्नी वक्फ बोर्ड को "अतिक्रमण होने और वहा उपस्थित मुतावल्ली (कार्यवाहक) होने के कारण वक्फ संपत्ति का प्रबंधन करने में असमर्थ रहा। इसने संपत्ति पर कब्ज़ा करने का आधार बनाया। अब, वक्फ नंबर 157 बोर्ड के प्रत्यक्ष प्रबंधन के अधीन हैं।'

क्या है जौहर ट्रस्ट का मामला

उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सीईओ एस.एम. शोएब.जुनैद खान ने कहा, "1900 में एक अनाथालय के रूप में रामपुर के नवाब रजा अली खान द्वारा वक्फ के रूप में भूमि को नामांकित किया गया था। उन अनाथों में से कुछ 40-42 वंशज भूमि पर रह रहे थे। 2016 में, उन्हें हटा दिया गया और मौलाना मोहम्मद मो अली जौहर ट्रस्ट ने संपत्ति पर कब्जा कर लिया।'

तीन माह से जेल में बंद हैं आजम

सांसद आजम खां, उनकी पत्नी विधायक डॉ. तजीन फातमा और बेटे अब्दुल्ला तीन माह से जेल में बंद हैं। उन्हें सीतापुर जेल में रखा गया है। तीनों ने 26 फरवरी को आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद से उन्होंने मुकदमों में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र लगाए थे। कुछ मामलों में जमानत भी हो गई थी, लेकिन लॉकडाउन के बाद से अदालतें बंद हो गई थीं। अब फिर अदालतें खुली हैं तो उनके अधिवक्ता ने जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिए थे। गुरुवार को चार जमानत प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई होनी थी। इनमें एक मामला यतीमखाना प्रकरण, एक शत्रु संपत्ति और आचार संहिता उल्लंघन के दो मामले हैं।

Posted By: Abhishek Kumar Tiwari
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