प्रयागराज कुंभ 2019 70 वर्षों में किसी संन्यासी को भारत रत्न नहीं स्वामी रामदेव

2019-01-28T16:55:39Z

योगगुरु स्वामी रामदेव ने आजादी के बाद से अब तक किसी संन्यासी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न नहीं दिए जाने पर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है

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PRAYAGRAJ: योगगुरु स्वामी रामदेव ने आजादी के बाद से अब तक किसी संन्यासी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न नहीं दिए जाने पर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है. प्रयागराज में चल रहे दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेले कुंभ में रविवार को पहुंचे स्वामी रामदेव ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि महर्षि दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद या सिद्धगंगा मठ के प्रमुख डॉ. शिवकुमार जी ने हजारों लोगों को शिक्षित करने का कार्य किया. लेकिन आज तक कला, खेल, राजनीति व समाजसेवा के क्षेत्र में ही भारत रत्न दिया गया है.

जाएगा आध्यात्मिक राष्ट्र का संदेश
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर हो रही देरी के सवाल पर स्वामी रामदेव ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर भी बनना चाहिए और जनमानस का चरित्र भी राम-सीता जैसा होना चाहिए. तभी सच्चे मायने में रामराज्य की परिकल्पना साकार हो सकेगी. उन्होंने कहा कि हमारे देश में सात लाख से अधिक संत-महात्मा हैं. प्रयागराज में दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक के कई बड़े-बड़े मठ-मंदिरों व संप्रदाय के संत-महात्मा नहीं आएं हैं लेकिन मुझे उम्मीद है कि यहां पर देशभर के अखाड़ों और मठों से जितने भी संत-महात्मा आस्था के साथ पहुंचे हैं उनके जरिए दुनिया में देश के आध्यात्मिक राष्ट्र बनने का संदेश जरूर जाएगा. स्वामी रामदेव ने प्रयाग कुंभ में केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि यहां पर गंगाजी में जल की मात्रा और स्वच्छता को लेकर अच्छे प्रयास किए गए हैं.

पांच दिनों तक योग का प्रशिक्षण
कुंभ में पांच दिनों के प्रवास के लिए रविवार को सुबह योग गुरु स्वामी रामदेव प्रयागराज पहुंचे. वे सेक्टर सात में स्थित गुरु का‌िर्ष्ण के शिविर में 31 जनवरी तक रहेंगे. शिविर के प्रभारी स्वामी ओंकारानंद ने बताया कि योग गुरु जनमानस को योग के माध्यम से निरोग रहने का संदेश देंगे. पांच दिनों तक अलग-अलग सत्रों में योग गुरु की अगुवाई में योग की साधना कराई जाएगी. इसके अलावा प्रख्यात कथावाचक रमेश भाई ओझा रामकथा और मलूक पीठाधीश्वर राजेन्द्र दास जी रामायण कथा कहेंगे.

 

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