एआईबीईए ने कहा कि बैंकों के विलय के बहाने सरकार बड़े कारोबारी घरानों की मदद करना चाह रही है। उन्होंने कहा कि बड़े बैंकों की निगरानी में मुश्किल आएगी।


चेन्नई (आईएएनएस)। सरकार सरकारी बैंकों का विलय करके बड़े कारोबारी घरानों की मदद करना चाहती है, इससे लोन के रूप में बड़ी मात्रा में डूब चुके धन प्राप्त करने में कोई मदद नहीं मिलेगी। 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का चार बैंक के रूप में विलय करने का विरोध कर रही ऑल इंडिया बैंक इम्पलाॅई एसोसिएशन (एआईबीईए) ने यह बात कही। एआईबीईए के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने यहां जारी अपने वक्तव्य में कहा कि बैंकिंग सुधारों के नाम पर सरकार बड़े कारोबारी घरानों की मदद करना चाह रही है।बैड लोन प्रावधानों के कारण नुकसान
वेंकटचलम ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल लाभ 150,000 करोड़ रुपये था। बैड लोन के प्रावधानों की वजह से करीब 66,000 करोड़ रुपये की शुद्ध हानि हुई थी। उनके मुताबिक बैंकों के विलय से डूब चुके धन की रिकवरी को लेकर कोई फायदा नहीं होने वाला। इधर दूसरी ओर भारतीय स्टेट बैंक के पांच सहायक बैंकों के विलय से बैड लोन में बढ़ोतरी ही दर्ज की गई। नीरव मोदी की धोखाधड़ी पता करने में नाकाम रहे पंजाब नेशनल बैंक का उदाहरण देते हुए वेंकटचलम ने कहा इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बड़े बैंक प्रभावशाली तरीके से कैसे निगरानी कर पाएंगे।

Posted By: Satyendra Kumar Singh