नहीं चेते तो बड़ा तालाब का मिट जाएगा वजूद

2018-10-10T06:00:12Z

RANCHI :सिटी की लाइफलाइन माने जानेवाले बड़ा तालाब में प्रदूषण का स्तर जानलेवा हो गया है। इसका पानी पीना मौत को दावत देने के बराबर है। वहीं, तालाब में नहाने वालों को तरह-तरह की स्किन डिजीज भी हो रही है। इसका खुलासा सेंट जेवियर्स कालेज में जीव विज्ञान की पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स द्वारा तालाबों के प्रदूषण स्तर जानने के लिए किए गए सर्वे में हुआ है।

कई तालाबों का सर्वे

मालूम हो कि सेंट जेवियर्स के स्टूडेंट अर्णव कुमार दास, ईशा मुखर्जी और श्रुति घोष के द्वारा किए गए सर्वेक्षण में रांची के बड़ा तालाब, लाईन टैंक तालाब, जोड़ा तालाब और बटम तालाब की प्रदूषण से संबंधित जानकारी एकत्र की गयी। इस दौरान उन्होंने 600 लोगों से बातचीत भी की थी। अगस्त-सितंबर महीने में किए गए इस सर्वे में पाया गया कि बड़ा तालाब सबसे ज्यादा प्रदूषित है।

ब्यूटीफिकेशन पर करोड़ों खर्च

हालांकि, तालाब को साफ करने और उसके सौन्दर्यीकरण पर करोड़ों रुपये पानी की तरह फूंके जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों के भीतर बड़ा तालाब एक पर्यटन स्थल के रुप में डेवलप होकर सामने आएगा, लेकिन पानी की सफाई के संबंध में पूछने पर हर संबंधित अधिकारी और एजेंसीज पल्ला झाड़ने में लग जाते हैं।

तालाब का मिट जाएगा वजूद

कूड़ा, पूजन सामग्री, गंदा पानी का जाना, कपड़े धोना,स्नान करना, मूर्ति विसर्जन आदि तालाबों के प्रदूषण स्तर में वृद्धि के प्रमुख कारण पाए गए.बटन तालाब और लाईन टैंक तालाब की घेराबंदी प्रशासन ने कर दी है। इन तालाबों के पानी का उपयोग दैनिक कार्य, मछली पालन आदि में किया जाता है। इन तालाबों पर निर्भर लोगों को जल संक्रमित बीमारियों और चर्म रोग आदि की समस्या हो रही है।

लोगों की भागीदारी से बचेंगे तालाब

छात्रों का सुझाव है कि लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए समय-समय पर जागरूकता और स्वच्छता अभियान का आयोजन किया जाना चाहिए। कॉलेज के जीव विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ भारती सिंह रायपत और शिक्षक मनोज कुमार के अधीन सर्वेक्षण का काम हुआ।


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