कुछ का बदला ठाट बाकि में है टाट

2019-01-18T06:00:18Z

फंड मिले भरपूर तो 900 स्कूल्स में कमियां हों दूर

-450 स्कूल्स हुए स्मार्ट, डेस्क-बेंच पर पढ़ रहे स्टूडेंट्स

-अभी भी नौ सौ बेसिक स्कूल्स में फंड की कमी से व्यवस्था बदहाल

VARANASI

बेसिक स्कूल को इंग्लिश स्कूल सरीखा बनाया जा रहा है। दो साल पहले डिस्ट्रिक्ट में स्कूल्स का कायाकल्प शुरू हुआ था। जो अब तक जारी है। अभी भी लगभग 900 से अधिक विद्यालय हैं जहां विकास की किरण नहीं पहुंची है। तमाम कवायद के बाद महज 26 स्कूल्स में स्मार्ट क्लास बनाए जा चुके हैं। जबकि 450 में ही डेस्क व कुर्सी लग पायी है। ऐसे में डिस्ट्रिक्ट के टोटल 1367 प्राइमरी स्कूल्स के स्मार्ट बनने में कई साल लग जाएंगे।

कंप्यूटर तो कहीं पहुंचा डेस्क

गवर्नमेंट ने प्राइमरी स्कूल्स को हाई फाई बनाने का प्लान जमीन पर उतारने के पहले ही धराशायी हो गया है। दावा किया गया कि सेशन शुरू होने से पहले सभी स्कूल्स में कंप्यूटर व स्टूडेंट्स को टाट पर बैठने से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि अब तक 50 विद्यालयों में दो-दो कंप्यूटर, पि्रंटर, 101 में आरओ व 580 स्कूल्स में रूम-टू-रीड बनवाए जा चुके हैं। वहीं करीब 450 स्कूल्स में ही टाट की जगह डेस्क-बेंच लगा है। जिन स्कूल्स में पीने के पानी का इंतजाम नहीं है उनमें से 170 विद्यालयों में समर्सिबल पंप लगवाने का टारगेट रखा गया है। समर्सिबल पंप के लिए पावर फाइनेंस कारपोरेशन ने सीएसआर फंड से 2.18 करोड़ रुपये दिये दिये हैं।

इनको कब मिलेगा सीएसआर फंड

बेसिक स्कूल्स को स्मार्ट बनाने के लिए सीएसआर से फंड मिल रहा है। जैसे-जैसे फंड मिल रहा है वैसे-वैसे स्कूल्स को चमकाया जा रहा है। यही वजह है कि अभी तक 900 स्कूल्स को स्मार्ट नहीं बनाया जा सका है। अब जब फंड मिले तो स्कूल्स में कंम्प्यूटर, स्मार्ट क्लास, रूम टू रीड, प्रिंटर, डेस्क-बेंच जैसी सुविधाएं स्टूडेंट्स को प्रोवाइड कराया जाए।

डिस्ट्रिक्ट के सभी स्कूल्स को स्मार्ट बनाया जा रहा है। अगले कुछ दिनों में बचे हुए स्कूल्स को सुविधा संपन्न बना दिया जाएगा।

जय सिंह, बीएसए

प्वाइंट टू बी नोटेड

-बेसिक स्कूल्स 1367

-प्राइमरी व जूनियर मान्यता प्राप्त विद्यालय 1500

-माध्यमिक स्कूल 384

-कांवेंट स्कूल 190


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