क्रिकेट बीसीसीआई और ताक़तवर हुआ

2014-01-29T13:30:00Z

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद आईसीसी की विवादित नई योजनाओं के तहत भारत इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का खेल पर पहले से ज़्यादा नियंत्रण हो जाएगा

आईसीसी का कहना है कि ''तीन बड़े देशों'' को फ़ायदा देने वाले खेल के ढांचे में बड़े बदलावों के एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से समर्थन मिला है.
लेकिन पाकिस्तान और दक्षिण अफ़्रीका के प्रतिनिधियों ने आईसीसी के इस दावे को ख़ारिज किया है. इन देशों का कहना है कि इस बारे में अभी कुछ तय नहीं हुआ है और फ़ैसला आठ फ़रवरी को होगा.

पिछले सप्ताह वो योजनाएं लीक हो गई थीं जिनसे इंग्लैंड, भारत और ऑस्ट्रेलिया को ज़्यादा अधिकार मिलेंगे और इनका दक्षिण अफ़्रीकी और पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्डों के अलावा खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय संघ- फीका, भी विरोध कर रहा है.

बड़े तीन की जगह पक्की

लेकिन दुबई में छह घंटे तक चली बैठक के बाद आईसीसी ने एक वक्तव्य जारी किया जिसमें ''भविष्य में क्रिकेट के ढांचे, संचालन और वित्तीय मॉडल'' के बारे में नियमों के लिए सर्वसम्मत समर्थन की बात कही गई है.
"पिछले छह महीनों में इंग्लैंड, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने चुपचाप ये योजना बनाई है. इसमें चिंता वाली बहुत सी बाते हैं और सच कहूं, तो मुझे नहीं लगता इनसे टेस्ट क्रिकेट का बहुत भला होगा. "
-जॉनाथन एग्नयू, बीबीसी क्रिकेट संवाददाता
इन नियमों के तहत आईसीसी की एक नई पांच सदस्यीय कार्यकारी समिति का गठन होगा जिसमें इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और भारतीय क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई, की जगह सुनिश्चित है.
आईसीसी की कार्यकारी समिति- टेस्ट खेलने वाले सभी दस देशों का पैनल है, जो फिलहाल खेल से जुड़े सब अहम फैसले करता है.
प्रस्तावों के मसौदे में कार्यकारी में सिर्फ़ चार सदस्यों का प्रावधान था इसलिए बड़े तीन देशों के अलावा एक पांचवें सदस्य के प्रावधान को रियायत के तौर पर देखा जा रहा है.
अन्य नियमों में तयशुदा विश्व टेस्ट चैंपियनशिप को रद्द करना और एक नई द्विस्तरीय व्यवस्था शामिल है, जिससे आईसीसी के एसोसिएट या सहायक सदस्यों को टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका मिल सकता है.
आईसीसी के छह मुख्य एसोसिएट देश अफ़ग़ानिस्तान, कनाडा, आयरलैंड, कीनिया, नीदरलैंड्स और स्कॉटलैंड हैं जो फिलहाल एकदिवसीय और ट्वेन्टी 20 क्रिकेट तो खेलते हैं लेकिन टेस्ट क्रिकेट नहीं.
पाकिस्तान और दक्षिण अफ़्रीका ने आईसीसी के प्रस्तावित बदलावों के लिए पूरे समर्थने के दावे को खारिज किया है.

टेस्ट क्रिकेट के लिए विशेष कोष

इसके अलावा टेस्ट क्रिकेट को बचाए रखने के लिए बदलावों के तहत एक विशेष कोष भी बनाया जा रहा है.
एक और अहम बदलाव ये होगा कि आईसीसी के फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम के ख़त्म होने के बाद टेस्ट खेलने वाले मौजूदा 10 देश अब एक दूसरे के साथ नियमित रूप से टेस्ट सिरीज़ खेलने के लिए बाध्य नहीं होंगे. इसकी जगह इन देशों के बीच 2015 से 2023 तक के लिए द्विपक्षीय समझौते होंगे.
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने बदलावों के लिए आईसीसी के पूरे समर्थन की बात से इनकार किया है. वहीं दक्षिण अफ़्रीकी बोर्ड ने कहा कि समर्थन सदस्य देशों के बोर्डों की मंज़ूरी पर निर्भर करेगा जिसके बाद अगले महीने आईसीसी बोर्ड की बैठक में अंतिम फैसला लिया जाएगा.

कुछ अन्य प्रस्तावित बदलाव इस प्रकार हैं-

-योग्यता के आधार पर सभी सदस्यों को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में खेलने का मौका, किसी देश को कोई छूट नहीं और सदस्यता में कोई बदलाव नहीं.
-भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के अलावा बाकी सभी पू्र्णकालिक सदस्यों को सालाना टेस्ट क्रिकेट कोष में से बराबर रकम दी जाएगी. -इसका मक़सद टेस्ट क्रिकेट को बढ़ावा और समर्थन देना है.
-साल 2015 से 2023 तक देशों के बीच द्विपक्षीय समझौते जो क़ानूनी तौर पर बाध्यकारी होंगे.
-आईसीसी में एक मज़बूत नेतृत्व की ज़रूरत को पहचानना जिसमें भारतीय क्रिकेट बोर्ड की केंद्रीय भूमिका होगी.
-हर चार साल की अवधि में आईसीसी के तीन मुख्य टूर्नामेंट खेले जाएंगे और इनमें विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की जगह चैंपियंस ट्रॉफ़ी खेली जाएगी.
आईसीसी अध्यक्ष एलन आइसैक का कहना था कि प्रस्तावित बदलाव क्रिकेट के भविष्य के लिए अहम हैं.



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