बीसीसीआई में लूट मचेगी कीर्ति आज़ाद

2013-10-04T15:12:00Z

विवादों में घिरे एन श्रीनिवासन एक बार फिर से बीसीसीआई के अध्यक्ष चुन लिए गए हैं उनके दामाद गुरुनाथ मयप्पन का नाम स्पॉट फ़िक्सिंग मामले में सामने आने के बाद से ही उन पर कुर्सी छोड़ने का दबाव लगातार बना हुआ था बीसीसीआई में श्रीनिवासन के एकछत्र राज पर बीबीसी से ख़ास बातचीत की पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आज़ाद ने

श्रीनिवासन के दोबारा चयन पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
श्रीनिवासन के चयन पर मुझे कोई आश्चर्य नहीं है क्योंकि इतने सारे राजनेता बैठे हैं जो नैतिक मूल्यों की बात करते हैं. मैंने इन्हें संयुक्त गठबंधन का नाम दिया है. भ्रष्टाचार में ये सभी एकजुट हैं. कोर्ट ने श्रीनिवासन के ख़िलाफ़ आदेश दिए हुए हैं.

बीसीसीआई में मौजूद कई नेताओं के ख़िलाफ़ पुलिस ने एफ़आईआर कर चार्जशीट भी दाख़िल कर दी है. उसके बावजूद ये नेता जो नैतिक मूल्यों की बात करते हैं, चुप हैं. बीसीसीआई में ऐसे दस-ग्यारह लोग हैं.
इनमें से किसी ने भी असहमति का पत्र नहीं दिया, किसी ने भी श्रीनिवासन का विरोध नहीं किया, जिसका मतलब है ये फ़ैसला बीसीसीआई सदस्यों की सहमति से लिया गया है.

श्रीनिवासन की मौजूदगी में क्या आईपीएल में स्पॉट फ़िक्सिंग की निष्पक्ष जांच संभव हैं ?

मैं एक खिलाड़ी हूं जिसके बाद एक राजनेता हूं. मैं दिल से खिलाड़ी हूं और अपनी इच्छा से राजनीति में आया हूं. राजनीति में आया हूं तो कोशिश करता हूं कि किसी भी तरह के ग़लत काम में ना फंसूं और अगर कोई ग़लत काम हो रहा है तो उसमें सामने वाले को फंसाऊं. मैं ना मयप्पन पर जाता हूं ना श्रीनिवासन पर, ये दोनों सेकेंडरी हैं.
ये नेता एसोसिएशंस में ऊंचे पदों पर बैठे हुए हैं. इनमें से छह एसोसिएशंस पर पैसे की गड़बड़ी को लेकर किसी ना किसी सरकारी एजेंसी की जांच चल रही है. चार ऐसे अध्यक्ष हैं जिन पर सीधे वित्तीय गड़बड़ी का आरोप है. ऐसी परिस्थिति में, मैं एक नेता होते हुए, एक क्रिकेटर होते हुए जिसने साल 1983 में वर्ल्ड कप जीता था, इनसे प्रश्न पूछना चाहता हूं कि ये क्यों कोई क़दम नहीं उठाते हैं.

श्रीनिवासन की लॉबिंग काफ़ी स्ट्रॉन्ग है... और शायद ये वजह है कि स्पेशल जनरल मीटिंग में जब ललित मोदी को बैन किया जा रहा था तो कोर्ट की अवहेलना करते हुए श्रीनिवासन ने बैठक की अध्यक्षता की थी.

श्रीनिवासन ऐसे व्यक्ति हैं जो अपना समर्थन करने वाले लोगों को पूरी ताक़त देते हैं. रंजीव बिसवाल ने ललित मोदी को बैन करने की चाल चली थी और उसका समर्थन किया था अनिरुद्ध चौधरी ने. उन दोनों को बीसीसीआई में बड़ा पद देकर इनाम दिया गया है.
रंजीव बिसवाल को आईपीएल का चेयरमैन बनाया गया है तो अनिरुद्ध चौधरी को बीसीसीआई का कोषाध्यक्ष चुना गया है. अब कोषाध्यक्ष श्रीनिवासन के ख़ास व्यक्ति को बनाया गया है तो राम नाम की लूट मची है.. और लूट मचेगी बोर्ड में.
आईपीएल क्या पैसा छापने की मशीन बन गई है क्योंकि हर कोई यही कहता है कि यहां सभी मैच फ़िक्स रहते हैं ?
हां, फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि पाकिस्तान में नक़ली नोट छपते हैं और बीसीसीआई दो नंबर के असली नोट छापता है. लोगों को मालूम है कि ये पैसा रूट होकर पाकिस्तान से होते हिंदुस्तान में आतंकवाद और दूसरे कार्यों के लिए इस्तेमाल होता है और बोर्ड उसमें बहुत बड़ा भागीदार है.
स्पॉट फ़िक्सिंग में बीसीसीआई ने दो खिलाड़ियों श्रीशांत और अंकित चव्हाण पर आजीवन बैन लगा दिया है लेकिन किसी भी अधिकारी का नाम सामने नहीं आया. क्या सिर्फ़ खिलाड़ियों को ही बलि का बकरा बनाया जा रहा है?
ये बात एकदम सच है और प्रत्यक्ष को प्रमाण की ज़रूरत नहीं होती. हमारे देश में केवल खिलाड़ी ही बैन होने के लिए बने हैं. साल 1999 में मैंने संसद में बात उठाई थी मैच फ़िक्सिंग को लेकर जब हैंसी क्रोनिए ने साउथ अफ़्रीक़ा में किंग्स कमिशन के सामने क़बूल किया था.
मेरे कहने के बाद सीबीआई ने कार्रवाई की उसके बाद कई प्रमाण सामने आए. बोर्ड ने कई खिलाड़ियों को बैन किया और आज वो ही खिलाड़ी खुले घूम रहे हैं क्योंकि बोर्ड ने अपने ही वकील भेजकर उन खिलाड़ियों का विरोध नहीं किया. बीसीसीआई ने 2013 तक तेरह चीज़ें लाने की बात कही थी जिससे उसके कामकाज में और पारदर्शिता आ सके. लेकिन उनमें से एक भी नहीं की गई.
जैसे ही आईपीएल आया बीसीसीआई के अधिकारी गुड़ पर मक्खी बनकर भिनभिनाने लगे.
आपको लगता है कि बीसीसीआई में तमाम गड़बड़ियों की वजह से इतनी कमिया आ गई हैं कि एक के पकड़े जाने पर सभी पकड़े जा सकते हैं?
साल 2009 में साउथ अफ़्रीक़ा में हुए आईपीएल के दूसरे सीज़न में रिज़र्व बैंक की इजाज़त के बिना भारतीय बोर्ड 200 मिलियन डॉलर विदेश ले गया था. इन्होंने प्रवर्तन निदेशालय और एफ़डीआई के नियमों को भी नकार दिया था.
अगर आप स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि बोर्ड ने सिर झुका कर माफ़ी मांगी और कहा कि हमसे ग़लती हो गई. इसके बावजूद प्रवर्तन निदेशालय ने जो नोटिस दिए हुए हैं उनका बीसीसीआई ने आज तक जवाब नहीं दिया. और जवाब देंगे भी नहीं क्योंकि इसमें पक्ष-विपक्ष सभी लोग हैं. यानी कि ये सरकार से ऊपर हैं और इसलिए बीसीसीआई मनमानी कर रहा है.

बीसीसीआई की धूमिल होती छवि का क्रिकेट पर कितना प्रभाव पड़ेगा?

कोई खेल ख़राब नहीं होता, कोई इंसान ख़राब नहीं होता. इंसान के कर्म ख़राब होते हैं, खेल ख़राब नहीं है. खेल को चलाने वाली ये मक्खियां उसे गंदा कर रही हैं. ऐसी मक्खियों को तुरंत मार देना चाहिए और खेल की जो बदनामी इनकी वजह से हो रही है, इन्हें जेल में बंद कर देना चाहिए.



This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.