इंटरव्यू ऑफ वीके बंसल

2014-02-04T07:00:01Z

बिकॉज यू आर द सोल्जर्स

सपनों को हकीकत में कैसे बदला जा सकता है? इसके लिए क्या करना पड़ेगा? इन सवालों का जवाब आज के दौर में जब कोई मेरीटोरियस स्टूडेंट अपने टीचर से पूछता है तो वो सोच में पड़ जाता है। क्योंकि इसका सही ऑन्सर शायद दुनिया के चंद टीचर्स को ही मालूम है। उन्हीं चंद टीचर्स में शामिल हैं बंसल क्लासेज के फाउंडर विनोद कुमार बंसल। करीब 32 वर्षो से हजारों स्टूडेंट्स के सपनों को सच कर चुके वीके बंसल का कहना है कि लगन, निष्ठा और मेहनत से इंजीनियरिंग की फील्ड में ही बड़ा नाम हासिल नहीं किया जा सकता है बल्कि लाइफ के हर रोल में सफलता पायी जा सकती है। क्योंकि जैसे सोल्जर्स कभी हारता नहीं वैसे स्टूडेंट्स को भी कभी हारना के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने इंजीनियरिंग के करियर से जुड़ी ही नहीं बल्कि लाइफ के और भी कई मूलमंत्र जाने उनसे। पेश हैं उनसे बातचीत के मुख्य अंश।

1. बंसल क्लासेज में ऐसा क्या पढ़ाया जाता है कि यहां के स्टूडेंट्स सिर्फ करियर की ही बुलंदियों को नहीं बल्कि और भी फील्ड में आगे रहते हैं?

यहां स्टूडेंट्स को कोर्स के साथ-साथ ये भी पढ़ाया जाता है कि लाइफ में कभी हार नहीं मानो। चाहें जितनी भी मुश्किलें आएं उनका डटकर मुकाबला करो और कभी चेहरे पर निराशा मत लाओ। अपनी तपस्या पर भरोसा रखो। लाइफ की हर फील्ड में बुलंदियों को छुओगे। बंसल क्लासेज के अंदर एंट्री करते ही स्टूडेंट्स को सरस्वती, लक्ष्मी और गणेश जी के दर्शन होते हैं जोकि जीवन भर उनके साथ रहते हैं। और स्टूडेंट्स को इन्हीं की लाइफ लॉन्ग जरूरत पड़ती है।

2. करियर में सफलता का मूलमंत्र क्या है?

धैर्य रखकर पढ़ाई करनी चाहिए। स्टूडेंट्स को हमेशा अपने आप से प्यार करते रहना चाहिए। नैतिक और अनैतिक मूल्यों को कंट्रोल करके आगे बढ़ने वाले हमेशा सफल होते हैं। पानी हमेशा ऊपर से नीचे की ओर गिरता पर जब उसको ऊपर ले जाना होता है तो प्रेशर लगाना पड़ता है ठीक उसी तरह स्टूडेंट्स की लाइफ को सक्सेसफुल बनाने के लिए टीचर, पेरेंट्स प्रेशर लगाते हैं। बस उसी तरफ अगर स्टूडेंट्स भी आगे बढ़े तो हर हाल में सफलता कदम चूमेगी।

3. एक स्टूडेंट से यहां तक के सफर के बारे में बताइए?

मैंने बचपन में एक बार अपने पिता जी से पूछा था कि घर में बिजली क्यों नहीं आ रही है? उन्होंने मुझसे कहा खूब मेहनत से पढ़ाई करो। हमेशा फ‌र्स्ट आओ। फिजिक्स से एमएससी करके लेक्चरर बन जाओ। फिर पैसे कमाओ तब बिजली आ जाएगी। पिताजी की ये बात सुनकर जुनून सवार हो गया। हमेशा क्लास में फ‌र्स्ट पोजीशन आई फिर 1963 में 372 रुपए की स्कॉलरशिप मिली और पिता जी ने लगन, मेहनत और निष्ठा से मिले पैसे का उपयोग कर घर में बिजली ला दी। 1971 में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल में इंजीनियरिंग करने के बाद मास्टर्स डिग्री ली और कोटा में एक नये करियर की शुरुआत की। पहले एक बच्चे को पढ़ाया और धीरे-धीरे स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ती गई। बच्चों का ही दिया नाम है बंसल क्लासेज। जो आज दुनिया में फेमस है।

4. बंसल क्लासेज का नाम आज दुनिया में है? इसके पीछे का राज?

अमेरिका के वॉल स्ट्रीट जर्नल से आए एक पत्रकार ने कहा था कि बंसल क्लासेज की बिल्डिंग दुनिया की एक ऐसी बिल्डिंग है जहां के किसी भी कोने पर कोई भी हैंडीकैप्टड व्यक्ति पहुंच सकता है। सिर्फ बिल्िडग ही नहीं यहां पढ़ने वाले आज पूरी दुनिया में नाम रोशन कर रहे हैं। स्टूडेंट्स से इतना प्यार है कि आज 65 साल की उम्र में जबकि हार्ट अटैक भी पढ़ चुका है और ब्रेन हैमरेज भी लेकिन स्टूडेंट्स को पढ़ाए बिना मन नहीं मानता है। स्टूडेंट्स के सवालों का ऑन्सर रात में सोते वक्त भी खोजता रहता हूं। पढ़ाना मुझे सबसे अच्छा लगता है।

आईआईटी जेइइ और दूसरे कॉम्टेटिव एग्जाम में स्टूडेंट्स को पहले लॉन्ग क्वेश्चंस सॉल्व करने चाहिए कि शॉर्ट?

क्वेश्चन पेपर देखते ही स्टूडेंट्स के मन में तीन ख्याल आते हैं। पहला ये कि इन क्वेश्चंस को तुरंत सॉल्व कर देंगे। दूसरा, कर सकता हूं लेकिन टाइम लगेगा और तीसरा मुश्किल है अगर उलझ गया तो फिर नहीं कर पाऊंगा। इसलिए सबसे पहले जो तुरंत कर सकते हो उनको करो फिर दूसरी वाली कैटेगरी में आओ फिर तीसरी में।

मैथ्स फोबिया को कैसे दूर किया जा सकता है?

देखिए मैथ्स फोबिया को दूर करने के लिए स्टूडेंट्स को लगातार सम्स और फॉर्मूले की प्रैक्टिस करनी चाहिए। अपने आप फोबिया दूर हो जाएगा।

स्टूडेंट्स को अक्सर पता रहता है कि मैथ्स, फिजिक्स और केमेस्ट्री में उनका कौन सा एरिया वीक है? इससे कैसे पार सकते हैं?

जो एरिया वीक है उसको छोड़ो नहीं बल्कि पूरी मेहनत से उस पर वर्क करो। एक, दो नहीं तो तीसरी बार में सफलता जरूर मिल जाएगी।

पीसीएम में स्टूडेंट्स को कंफ्यूजन बहुत रहता है? इसको कैसे दूर किया जा सकता है?

कंफ्यूजन उन स्टूडेंट्स को होता है जो क्लास में टीचर्स से कुछ पूछने में हिचकिचाते हैं। जो प्रॉब्लम है उसको तुरंत अगर स्टूडेंट्स दूर कर लें तो फिर कंफ्यूजन कभी नहीं होगा।

इंडियन इंटैलिजेंस टेस्ट के बारे में क्या कहेंगे?

ये टेस्ट काफी इंम्पॉर्टेट है। हर स्टूडेंट की अपनी एक अलग विशेषता होती है। अगर वो उसी तरफ मेहनत करे तो सफलता उसके कदम चूमेगी। इस टेस्ट के माध्यम से ये मालूम चल जाएगा कि स्टूडेंट किस फील्ड में जा सकता है। इसलिए स्टूडेंट्स को ये टेस्ट जरूर देना चाहिए।

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