'कलियुग में दान करना ही जीवन के लिए मंगलकारी'

2019-12-15T05:45:35Z

GORAKHPUR: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से चंपा देवी पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें और अंतिम दिन कथा वाचक आस्था भारती ने कहा कि इस कलियुग में दान करना ही जीवन के लिए मंगलकारी है। उन्होंने कहा कि कलियुग में धर्म का एक ही चरण शेष रहेगा और वह है दान। श्रीरामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि कलयुग में धर्म के चार पदों में से दान ही प्रधान रह जाएगा और वही मानव जीवन का कल्याण करेगा। अपने ध्यान को धर्म यज्ञ में आहुति के रूप में लगाएं और जीवन में लाभ की प्राप्ति करें। भागवत की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को श्राप मिला था कि सात दिवस के बाद उनकी मृत्यु हो जाएगी। परंतु परीक्षित ने इस लघु अवधि का इतना अपूर्व रूप से सदुपयोग किया कि उनके लिए मोक्ष के द्वार खुल गए। लेकिन यहां ध्यान देने की बात यह है कि परीक्षित की मुक्ति केवल हरि चर्चा या कृष्ण लीलाओं को श्रवण करने मात्र से नहीं हुई थी। अपितु पूर्ण गुरु सुखदेव महाराज के द्वारा प्रभु के तत्व रूप को अपने अंदर जान लेने पर हुई थी। इस अवसर पर मुख्य यजमान व्यापारी कल्याण बोर्ड के प्रदेश उपाध्यक्ष पुष्पदंत जैन, तुलस्यान फार्मा के निदेशक राजेश कुमार तुलस्यान, राम नक्षत्र सिंह ट्रेडर्स के महेंद्र सिंह, विजय अग्रवाल, अरुण कुमार मिश्रा, स्वामी नरेंद्रानंद, स्वामी सुमेधानंद, स्वामी अर्जुनानंद, अशोक अग्रवाल, नंदू मिश्रा, विकास जालान, जगरनाथ, मिथलेश शर्मा, दिनेश चौरसिया, अच्छेलाल गुप्ता, मुन्ना यादव, प्रभा पांडेय आदि मौजूद रहे।


Posted By: Inextlive

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