अमृत योग में भैरव पूजन कर राहू को करें शांत

2018-11-28T06:01:07Z

-30 नवम्बर को मनाई जाएगी भैरव अष्टमी, समय अनुसार करें पूजन

BAREILLY :

मार्गशीष कृष्णाष्टमी को मध्याह्न के समय भगवान शंकर के अंश से भैरव की उत्पत्ति हुई थी। इसीलिए यह दिन भैरवाष्टमी के रूप में उत्सव के समान मनाया जाता है। इस बार अमृत योग में भैरव पूजन कर राहू ग्रह को शांत कर सकते हैं।

अष्टमी को भैरव ने लिया था अवतार

शिव पुराण की शतरूद्र संहिता के अनुसार परमेश्वर सदाशिव ने मार्गशीष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भैरव रूप में अवतार लिया था। उन्हें साक्षात् भगवान शंकर ही मानना चाहिए, पुराणों के अनुसार भैरव भगवान शिव का दूसरा रूप हैं, भैरव का अर्थ भयानक तथा पोषक दोनों हैं, इनसे काल भी सहमा रहता है। इसलिए इन्हें काल भैरव कहा जाता है।

शाम 4.55 बजे तक अष्टमी

29 नवम्बर को सप्तमी तिथि सायं 6:46 बजे तक रहेगी। जिसके बाद अष्टमी मान लगेगा, जो फ्राइडे को सायं 4:55 बजे तक रहेगी। क्योंकि इस बार उदय व्यापिनी एवं मध्याह्न व्यापिनी दोनों ही तिथियां 30 को मिल रही हैं। भैरव जयंती 30 नवम्बर को मनाना उचित रहेगा। इस रात्रि काल में भी पूजन करना एवं राहू की शांति के लिए जाप करना श्रेष्ठ रहेगा।

ऐसे करें व्रत

यह व्रत बहुत ही अच्छा माना जाता है, इस दिन व्रत रखकर जल अ‌र्ध्य देकर भैरवजी के वाहन सहित उनका पूजन करना चाहिए। इस दिन चारों पहरों में सुबह, दोपहर, सांयकाल एवं रात्रिकाल में भगवान भैरवजी का पूजन करना चाहिए, दिन में भैरव जी के मंत्र ऊं भैरवाय नम: का जाप करना चाहिए और भैरव सहस्त्रनाम तथा भैरव देव के चालीसा का पाठ करना चाहिए। रात्रि को जागरण करके भगवान शिव जी एवं भैरव देव जी की कथाओं का पाठ एवं श्रवण करना चाहिए, मध्य रात्रि में शंख, घण्टा, नगाड़ा आदि बजाकर काल भैरव जी की आरती करनी चाहिए।

पूजा का समय:

प्रात: 07:25 बजे से 10:20 बजे तक, दोपहर 12:00 बजे से 01:30 बजे तक, रात्रि 08:50 से 10:25 बजे तक अ‌र्द्धरात्रि 12:00 बजे से 03:08 बजे तक।

भगवान शिव के दो रूप हैं

भैरव नाथ एवं विश्व नाथ, एक रूप तो अत्यन्त विकराल, रौद्र, भयानक, प्रचण्ड तथा दूसरा रूप अत्यन्त शील, करुण, शान्त, सौम्यता का प्रतीक है। पहला रूप पापी, धर्मद्रोही तथा अपराधियों को दण्ड देने के लिए है तथा दूसरा रूप सौम्य रूप जगत की रक्षार्थ माना जाता है। भैरव जी का दिन संडे तथा ट्यूजडे माना जाता है, इस दिन इनकी पूजा करने से भूत-प्रेत, बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। इस दिन पूजा-उपासना से ही प्रसन्न होकर भैरव जी भक्त की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति कर देते हैं। इस दिन भैरव के वाहन श्वान (कुत्ते) का पूजन करके श्वान समूह को दूध, दही, मिठाई आदि खिलानी चाहिए। इस दिन किसी असहाय व्यक्ति को शराब की बोतल दान देने से भैरव जी अति प्रसन्न होते हैं।


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