पाटिपुल के पास और दूसरे प्वाइंट से भी गिर रहा है पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के पाटीपुल के पास गिर रहा है झागनुा पानी

पटना (ब्यूरो)। पटना के पाटीपुल घाट के पास यमुना नदी जैसा सफेद झागनुमा गंदा पानी गिर रहा है। यह दीघा नाला से गिर रहा है। न कोई ट्रीटमेंट न ही कोई बैरिकेडिंग, यह सीधे गंगा नदीं में जा रहा है। यहां कौन सा केमिकल गिर रहा है और इसका वैज्ञानिक रूप से क्या बुरा असर पड़ेगा, अभी यह जांच का विषय है। इसे लेकर आगे पड़ताल होनी बाकी है। गंगा में गिर रहा यह सफेद झाग पटना स्मार्ट सिटी में गंगा में बिना ट्रीटमेंट के गिर रहे पानी की स्थिति बयां कर रहा है। नमामि गंगे योजना को शुरू करने का मिशन है कि बिना ट्रीटमेंट के गंगा में गंदा पानी न गिरे, लेकिन यह तस्वीर इसके ठीक उलट है।

पहले ऐसा दृश्य नहीं दिखा था
बिहार स्टेट पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार, पहले ऐसा दृश्य गंगा के किसी घाट पर नहीं दिखा था। हां, अलग-अलग घाट के पास वाटर पाल्यूशन की स्थिति क्या रही है, इसकी जांच होती रही है एक रूटीन के तौर पर। लेकिन अभी जो सफेद झाग पाटीपुल पुल के पास दिख रहा है, वह स्थानीय लोगों और जांच करने वाली टीम के लिए भी कौतुहल का विषय बना हुआ है।


हर 15 दिन पर जांच
गंगा में प्रदूषण की स्थिति कब क्या है? इस बारे में बिहार स्टेट पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सेक्रेटरी एस। चंद्रशेखर ने बताया कि गंगा में प्रदूषण की स्थिति की जांच के लिए एक प्रोटोकॉल बना हुआ है। जिसके अंतर्गत नमामि गंगे की ओर से गंगा में हर 15 दिनों पर जांच की जाती है और गंगा की सहायक नदियों में हर माह पाल्यूशन की जांच की जाती है। क्या रैंडम जांच भी किया जाता है? उन्होंने कहा कि बोर्ड की ओर से ऐसा रैंडम टेस्ट नहीं किया जाता है।

स्थानीय नागरिक ने दी जानकारी
दीघा नाला के पास से गंगा में गिर रहे सफेद झागनुमा पानी की जानकारी स्थानीय नागरिक शुभम ने दी। उन्होंने बताया कि ऐसा दृश्य उन्होंने भी पहली बार देखा है और गंगा को स्वच्छ रखने की बात आधी-अधुरी है। क्योंकि यहां तो बिना किसी ट्रीटमेंट के ही जहरीला पानी गिराया जा रहा है।

35 किलोमीटर सबसे ज्यादा प्रदूषित
पटना शहर में दानापुर से लेकर फतुहां तक सबसे अधिक गंदगी गिरता है। यह करीब 35 किलोमीटर का एरिया है जहां करीब 100 से अधिक छोटे-बड़े नाले गंगा में गिरते हैं। गंगा में सीधे गंदगी न गिरे। इससे पहले इसका प्रॉपर ट्रीटमेंट कर लिया जाए, उसके बाद ही गंगा में इसे छोड़ा जाए। इसी कारण नमामि गंगे की योजना के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और इससे शहर के संबंधित समीपवर्ती सघन आबादी वाले कॉलोनियों को जोड़ा गया है। हालांकि अभी यह काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। नमामि गंगे की यह योजना अभी भी शहर में बोरिंग रोड समेत अलग-अलग हिस्सों में जारी है।

कोट
बोर्ड ने जांच टीम गठित की है। जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही यह खुलासा हो सकता है कि यहां कौन सा केमिकल है और इसका सोर्स है।
- एस चंद्रशेखर, सचिव बिहार स्टेट पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड

Posted By: Inextlive