सिस्टम को कोसने से नहीं खुद को बदलने बदलेगी सूरत

2019-10-18T05:46:03Z

- दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की बिन में फेंक मुहिम को पब्लिक ने सराहा

घर के बाहर, मोहल्ले में जब कचरे का ढेर लगता है। झाड़ू नहीं लगता है तो लोग नगर निगम के साथ ही पूरे सिस्टम को कोसते हैं। सफाई कर्मचारी के आते ही भड़ास निकालने लगते हैं। जबकि सिस्टम कोसने वालों में ऐसे लोग ज्यादा होते हैं, जो खुद अपने घर के बाहर कचरे का ढेर लगाते हैं। सफाई कर्मियों के जाने और सफाई होने के बाद कचरा बाहर फेंक देते हैं। शिकायत करने वालों की भीड़ में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो सिस्टम को कोसने के बजाय खुद को बदलने के साथ ही लोगों को भी बदलाव की नजीर दे रहे हैं।

लोगों से शेयर की अपनी बात

ऐसे लोगों से दैनिक जागरण आईनेक्स्ट रिपोर्टर ने बातचीत की। लोगों से पूछा गया कि घर का कचरा कहां फेंकना चाहिए? गंदगी है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है? केवल नगर निगम दोषी है या पब्लिक भी जवाबदेह है? अगर मोहल्ले में डस्टबिन नहीं है, या सफाई कर्मचारी कचरा लेने नहीं आते हैं तो वे क्या करते हैं? इन सवालों का जवाब लोगों ने बखूबी देते हुए ये बताया कि सारी जिम्मेदारी केवल सिस्टम और एडमिनिस्ट्रेशन की नहीं। बल्कि उनके जैसे लाखों लोगों की है। जब लोग सुधर जाएंगे तो सिस्टम अपने आप सुधर जाएगा।

प्रयागराज को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए केवल नगर निगम, पीडीए और डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ही जिम्मेदार है, ऐसा बिल्कुल नहीं है। जब तक यहां के लोग स्मार्ट नहीं होंगे, लोगों में स्मार्टनेस नहीं आएगी।

कुसुमलता गुप्ता

पार्षद

मैं और मेरा परिवार, सफाई को लेकर हमेशा जागरुक है। हमें अपनी जिम्मेदारी का एहसास है, इसलिए हम लोग कचरा बाहर फेंकने के बजाय डस्टबिन में ही रखते हैं। सुबह के समय जब सफाई कर्मचारी आते हैं, तो फिर उन्हें पकड़ा देते हैं।

रमेश केसरवानी

मैं पर-डे मार्निग वॉक के लिए कंपनी गार्डेन जाती हूं। अपने घर के साथ ही गार्डेन में भी सफाई का ध्यान रखती हूं। यहां-वहां पार्क में जो गंदगी पड़ी रहती है, उसे डस्टबिन में फेंक देती हूं। साथ ही लोगों को अवेयर करती हूं कि वे कचरा यहां-वहां न फेंक।

रंजना

मेरे मोहल्ले में भी डस्टबिन नहीं है। इसका मतलब ये नहीं कि मैं कचरा अपने घर के बाहर या किसी और के घर के बाहर फेंक दूं। पर-डे सर्फाइकर्मियों की गाड़ी आने पर कचरा उसमे डाल देता हूं।

दिनेश सिंह

मेरा वार्ड व्यापारियों का गढ़ है। बहुत से व्यापारी ऐसे हैं, जो अपने दुकान का कचरा बाहर फेंक देते थे। मैने प्रयास करते हुए लोगों से अपील की कि वे कचरा यहां-वहां नहीं बल्कि डस्टबिन में फेंके।

रुचि गुप्ता

पार्षद

मैं खुद गेस्ट हाउस का मालिक हूं। मेरे गेस्ट हाउस में जब भी कोई आयोजन होता है, सफाई को लेकर काफी एक्टिव रहता हूं। अगले दिन गंदगी व कचरे को प्रॉपर स्पॉट पर फेंकवाता हूं।

गुफरान अहमद

सचिव, गेस्ट हाउस एसोसिएशन

मेरा वार्ड बहुत ही पिछड़ा और संकरा है। जिसमें गलियां सबसे ज्यादा हैं। जहां सीपी और डीपी नहीं रखा जा सकता है। इसके बाद भी सफाई कर्मचारी प्रॉपर आते हैं। लोग अपने घरों का कचरा सफाई कर्मचारी को दे देते हैं।

जिया उबैद खां

पार्षद

सफाई जबर्दस्ती नहीं कराई जा सकती है। ये एक संस्कार है, जो लोगों को खुद से पैदा करने की जरूरत है। मैं अपने घर का कचरा डस्टबिन में रखती हूं।

अंजली विशाल

Posted By: Inextlive

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